नई दिल्ली: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के मजबूत रिश्तों की सबसे बड़ी वजह ‘भरोसे’ को बताया है। इसी भरोसे के कारण अमेरिका अपनी 40% जेनरिक दवाएं भारत से लेता है। एनर्जी सेक्टर (LNG/LPG) में 40% का ऐतिहासिक व्यापार कर रहा है। यह साझेदारी दोनों देशों के गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दिखाती है।
भारत को बताया बिल्कुल अलग
सर्जियो गोर ने कहा कि जब भारतीय कंपनियां अमेरिका में निवेश करती हैं तो यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद स्थिति होती है। वह बोले, ‘आपको दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजार तक पहुंच मिलती है। आप भारत और अमेरिका में नौकरियां पैदा करते हैं। हर दिन हमें ऐसे वास्तविक अवसर दिखाई देते हैं जो सच कहूं तो दूसरे दूतावासों में नहीं मिलते…।’
रुकावटों को दूर करने पर दिया जोर
गोर ने कहा, ‘इस आर्थिक इंजन की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए हमें सच्चे साझेदारों के तौर पर मिलकर रुकावटों को दूर करना होगा। हमें ऐसे अनुमानित टैक्स और रेगुलेटरी सिस्टम की जरूरत है जो व्यवसायों को फलने-फूलने दें। हमें एक्सपोर्ट कंट्रोल और टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान पर खुलकर और भरोसे के साथ बातचीत करने की जरूरत है।’इसके साथ उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों को मजबूत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी सुरक्षा की जरूरत है ताकि इस कमरे में मौजूद हर इनोवेटर को बिना किसी डर के निवेश करने, कुछ नया बनाने और अपने काम को बढ़ाने का भरोसा मिल सके।
जेनरिक दवाओं पर कही ये बात
जेनरिक दवाओं के संबंध में भी सर्जियो गोर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘हम अपनी 40% जेनेरिक दवाएं भारत से मंगाते हैं। यह एक बहुत बड़ी संख्या है। कारण है कि हमें भारत पर भरोसा है।’
एनर्जी सेक्टर का जिक्र करते हुए वह बोले, ‘हम ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व स्तर पर काम कर रहे हैं। इसके पीछे भी एक कारण है। पिछले साल हमारे LNG या LPG के आयात और निर्यात का 40% हिस्सा भारत से जुड़ा था क्योंकि हमें भारत पर भरोसा है…।’