उधर रूस में पेट्रोल के लिए मारामारी, इधर भारत ने बिना देरी पहुंचा दी पहली खेप

नई दिल्‍ली: भारत से गैसोलीन (पेट्रोल) की कम से कम एक खेप रूस के घरेलू बाजार में पहुंची है। रूस में पेट्रोल की किल्‍लत के बीच ऐसा हुआ है। रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण वहां ईंधन की कमी हुई है। मॉस्‍को इसे दूर करने की कोशिश में जुटा है। रॉयटर्स ने इंडस्ट्री के तीन सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। साथ ही LSEG के शिपिंग डेटा से भी इसका पता चला है।

रूस ने किए हैं कई उपाय

तेल रिफाइनरियों पर बार-बार यूक्रेनी हमलों के कारण रूस में ईंधन की कमी हुई है। कीमतों में उछाल आया है। इसके बाद रूस ने घरेलू ईंधन बाजार को सहारा देने के लिए कई उपाय किए हैं। इन उपायों में बेलारूस और कजाकिस्तान से रेल के जरिए पेट्रोल का आयात और ईंधन के निर्यात पर रोक शामिल है।

उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने जुलाई में कहा था कि रूस घरेलू बाजार को स्थिर करने में मदद के लिए तेल उत्पादों का आयात शुरू करेगा।

भारत के वाडिनार बंदरगाह पर हुई लोडिंंग

सूत्रों ने बताया कि ओमान के झंडे वाले एक टैंकर ने ‘अग्नि’ टैंकर से ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए पोर्ट सईद एंकरेज पर लगभग 68,000 टन गैसोलीन लोड किया। ‘अग्नि’ टैंकर को भारत के वाडिनार बंदरगाह पर लोड किया गया था।

शिपिंग डेटा से पता चला कि टैंकर ने अगस्त की शुरुआत में रूस के आर्कटिक बंदरगाह विटिनो में यह खेप उतारी।

सूत्रों ने आगे बताया कि गैसोलीन को रेल के जरिए घरेलू खरीदारों तक पहुंचाने के लिए बंदरगाह पर ट्रांसशिप किया जा रहा है। शिपमेंट पहले ही शुरू हो चुके हैं।

भारत से दो और खेपें पहुंचने की उम्मीद

इंडस्ट्री के सूत्रों ने पहले रॉयटर्स को बताया था कि व्यापारियों ने रूस को भारतीय रिफाइनर नायरा एनर्जी की ओर से उत्पादित गैसोलीन बेचा है।

LSEG डेटा के अनुसार, अगले दो हफ्तों में भारत से गैसोलीन की कम से कम दो और खेपें रूसी बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

रॉयटर्स ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट दी थी कि रूस ने एशिया से अपने सुदूर पूर्वी बंदरगाहों तक समुद्री रास्ते से डीजल का आयात शुरू कर दिया है।

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