UNSC में पाकिस्तान ने भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का किया विरोध, शहबाज के दूत ने संयुक्त राष्ट्र में जताया डर

न्यूयॉर्क/इस्लामाबाद: संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा है कि उनके पड़ोसी देश (भारत) के पास सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का दावा करने के लिए ‘कोई योग्यता नहीं’ है। पाकिस्तान टीवी डिजिटल के शो ‘साउथ स्पीक्स विद साकिब’ में बोलते हुए अहमद ने कहा कि परिषद में सीट चाहने वाले देशों के वोटिंग रिकॉर्ड, सुरक्षा परिषद के पिछले प्रस्तावों का पालन और UN चार्टर के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की जांच की जाती है।

उन्होंने कहा ‘ऐसे कई देश हैं जिनमें जाहिर तौर पर हमारा पड़ोसी देश भी शामिल है जिनके पास सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का दावा करने के लिए भी कोई योग्यता नहीं है।’ पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील के G4 समूह की ओर से नई स्थायी सीटों की मांग ही वह वजह है जिसने दो दशकों से सुधारों को रोक रखा है। उन्होंने कहा ‘यह इस पूरी प्रक्रिया से एक खास विशेषाधिकार मांगने जैसा है। हमारा मानना ​​है कि यह एक अनुचित मांग है और न सिर्फ अनुचित बल्कि यह अव्यावहारिक भी है।’

UNSC की रेस में भारत के नाम से क्यों डर रहा पाकिस्तान?

पाकिस्तान को डर है कि अगर भारत यूएनएससी का सदस्य बन जाता है तो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के कई काम को भारत रोकेगा। जैसे सूडान में यूएन की आपत्तियों के बावजूद पाकिस्तान ने हथियार सप्लाई की है। पाकिस्तानी दूत ने कहा कि गाजा और यूक्रेन जैसे संकटों पर परिषद का बार-बार ठप पड़ जाना पांच स्थायी सदस्यों के रुख और उनके वीटो के इस्तेमाल का नतीजा है।

उन्होंने कहा ‘अगर पांच स्थायी सदस्यों के रुख की वजह से परिषद अक्सर गतिरोध का शिकार हो जाती है तो आप सोच सकते हैं कि अगर मौजूदा पांच सदस्यों के बजाय आठ, नौ या 10 स्थायी सदस्य हों तो यह और भी ज्यादा ठप हो जाएगी।’ अहमद ने कहा कि और वीटो रखने वाले सदस्य जोड़ने का मतलब है ‘और ज्यादा समस्याएं।’

भारत स्थायी सदस्यता हासिल करने की कर रहा कोशिश

आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी 21वीं सदी की वैश्विक वास्तविकताओं के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों और विस्तार पर आधारित है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे ज्यादा आबादी वाला देश और पांचवीं सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था होने के नाते परिषद में स्थायी सीट का मजबूत दावेदार है। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं जबकि चीन इकलौता विरोधी है। चीन के वीटो की वजह से यूएनएससी में भारत को स्थायी सदस्यता नहीं मिल पाती है।

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