मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों को अपनी ही लूटी हुई रकम वापस पाने में एक अजीबोगरीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के बाद ठगों के बैंक खातों में होल्ड (फ्रीज) की गई राशि लौटाने की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई है, लेकिन इसके लिए मध्य प्रदेश में पीड़ितों को 1000 रुपये का क्षतिपूर्ति बॉन्ड देना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अगर किसी पीड़ित को महज 500 रुपये का रिफंड भी लेना है, तब भी उसे 1000 रुपये का स्टाम्प खरीदना ही होगा।
स्टाम्प कानून की बाध्यता बन रही बाधा
- यह पूरी समस्या ‘इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899’ के नियमों के कारण पैदा हुई है। इस एक्ट के तहत मध्य प्रदेश में क्षतिपूर्ति बॉन्ड के लिए 1000 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी अनिवार्य है।
- वर्तमान एसओपी (SOP) में यह स्पष्टीकरण नहीं है कि कितनी रकम की वापसी पर कितने मूल्य का स्टाम्प देना होगा। इसी कानूनी पेंच के कारण जिन लोगों की कम राशि ठगी गई है, उनके लिए रिफंड प्रक्रिया आर्थिक रूप से अव्यावहारिक साबित हो रही है।