नई दिल्ली: मशहूर उद्योगपति हर्ष गोयनका ने मंदिरों में बढ़ती वीआईपी संस्कृति और धार्मिक स्थलों को प्रचार का जरिया बनाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों में भगवान के दर्शन के लिए जाने वाले भक्तों के बीच हैसियत के आधार पर फर्क नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल किया।
VIP कल्चर पर उठाया सवाल
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मंदिरों में फोटोग्राफरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ पहुंचने वाले लोगों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने धार्मिक स्थलों पर दर्शन को प्रचार और सोशल मीडिया कंटेंट से जोड़ने की प्रवृत्ति को अनुचित बताया।
आम भक्तों की लंबी कतारों के बीच चर्चा
गोयनका की यह टिप्पणी गणेशोत्सव के दौरान लालबागचा राजा के दर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच आई है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और लंबी कतारों में इंतजार करते हैं।
लालबागचा राजा मंडल का नियम
लालबागचा राजा मंडल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मंडल वीआईपी पास जारी नहीं करता और दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लेता। यहां श्रद्धालुओं के लिए मुख दर्शन और चरण स्पर्श दर्शन की व्यवस्था है और दोनों ही निशुल्क हैं।
इसलिए वीआईपी संस्कृति को लेकर होने वाली बहस में आधिकारिक व्यवस्था और प्रमुख लोगों को मिलने वाली सुविधा के बीच अंतर करना जरूरी है। मंडल की वेबसाइट के अनुसार औपचारिक रूप से वीआईपी दर्शन पास की व्यवस्था नहीं है।
यूजर्स ने भी उठाए सवाल
Dinesh Joshi नामक यूजर ने लिखा, ‘मैंने यहां कभी दर्शन नहीं किए, शायद यह मेरा दुर्भाग्य है। उन लोगों के लिए दुख होता है जो घंटों खड़े रहते हैं और भगवान के सामने खड़े होने का एक पल भी नहीं पाते, सेल्फी लेने का तो सपना ही छोड़ दीजिए। बहुत दुख की बात है।’
Arvind Pradhan नाम यूजर ने लिखा है कि यह बिलकुल सच है। भगवान के सामने सब बराबर हैं, लेकिन इंसानों ने कुछ लोगों को दूसरों से ज्यादा अहमियत दे दी है। ऐसे लोगों को देखकर घिन आती है जो भगवान से प्रेम करने का दावा तो करते हैं, लेकिन दूसरों की तकलीफों को नजरअंदाज़ कर देते हैं। मैं ऐसे भीड़-भाड़ वाले सेलिब्रिटी पंडालों में कभी नहीं जाता।