अमेरिका-चीन की दोस्तीः जापान-ताइवान की बढ़ी टेंशन, भारत के लिए भी अलर्ट!; इंडियन एक्सपर्ट ने किया आगाह

नई दिल्ली: जाने-माने जिओ पॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने अमेरिका और चीन के बीच बनते अनौपचारिक ‘G2’ (दो देशों के प्रभुत्व वाले) ढांचे को लेकर दुनिया को आगाह किया है। ब्रह्मा चेलानी का साफ मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच इस संभावित साठगांठ का सबसे बड़ा नुकसान अमेरिका के अपने ही मित्र देशों को उठाना पड़ेगा। अमेरिका के इस अनिश्चित और बदलते व्यवहार के कारण अब उसके सहयोगियों को अपनी सुरक्षा के लिए नए सिरे से रणनीतिक तैयारियां शुरू करनी पड़ रही हैं।

ताइवान और जापान में बढ़ती चिंताएं

ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक इस नए भू-राजनीतिक समीकरण से ताइवान में गहरी चिंता है। ताइवान को डर है कि अमेरिका और चीन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत में उसकी संप्रभुता और सुरक्षा को एक ‘मोल-भाव के जरिए’ इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, जापान भी इस कूटनीतिक बदलाव से असहज महसूस कर रहा है। टोक्यो को आशंका है कि चीन के प्रति डोनाल्ड ट्रंप का नरम रुख और ‘G2’ की तरफ झुकाव, दशकों पुराने अमेरिका-जापान सुरक्षा गठबंधन को कमजोर कर सकता है, जो पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता का आधार रहा है।

भारत के बहु-ध्रुवीय विजन पर सीधा प्रहार

ब्रह्मा चेलानी ने स्पष्ट किया कि यह अनौपचारिक G2 ढांचा भारत के राष्ट्रीय हितों के भी बिल्कुल खिलाफ है। दरअसल, भारत लंबे समय से एक ‘मल्टीपोलर एशिया’ (कई ध्रुवों वाले एशिया) की वकालत करता रहा है, जहां किसी एक या दो शक्तियों का दबदबा न हो। चेलानी के मुताबिक, अमेरिका और चीन का यह गठजोड़ भारत के इस क्षेत्रीय विजन के पूरी तरह उलट है और यह एशिया में शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चेलानी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिकी विदेश नीति में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सुरक्षा समीकरणों में भारी उथल-पुथल की संभावना बढ़ गई है।

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