वॉकिंग को सबसे आसान और कम-इम्पैक्ट वाली फिजिकल एक्टिविटी में गिना जाता है। यह कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ, मोबिलिटी, और ओवरऑल फिटनेस के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या बहुत ज्यादा वॉकिंग घुटनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल सकती है? इसका जवाब केवल “ज्यादा चलना नुकसानदायक है” या “जितना चलें उतना अच्छा” नहीं है। वॉकिंग का असर व्यक्ति की उम्र, बॉडी वेट, मसल्स स्ट्रेंथ, घुटनों की मौजूदा समस्या, वॉकिंग की जगह, जूते और अचानक बढ़ाई गई एक्टिविटी पर निर्भर कर सकता है।
क्या रोजाना ज्यादा वॉकिंग करने से घुटनों को नुकसान पहुंच सकता है?
आमतौर पर सिर्फ वॉकिंग करने को घुटनों के नुकसान का कारण नहीं माना जाता। लेकिन, ज्यादा चलते समय घुटने का अत्यधिक उपयोग करने से जोड़ों पर यांत्रिक भार (मेकैनिकल लोड) और सोफ्ट टिशू पर घर्षण बढ़ जाता है, जिससे दर्द होता है। एनसीबीआई के अनुसार स्टडीज से पता चलता है कि यह इलियोटिबिअल बैंड (आईटी बैंड) सिंड्रोम और घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों को ट्रिगर कर सकता है या उन्हें और खराब कर सकता है।
वॉकिंंग और घुटनों की हेल्थ के बीच क्या कनेक्शन है?
इसका मतलब यह नहीं कि हर कदम घुटने को नुकसान पहुंचाता है। शरीर इन फोर्सेज (forces) को मसल्स, कार्टिलेज, टेंडन और अन्य टिशू के माध्यम से अवशोषित और विभाजित करता है। रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी मसल्स को मजबूत रखने और मोबिलिटी बनाए रखने में मदद कर सकती है।
एनसीबीआई के अनुसार घुटनों के ऑस्टियोअर्थराइटिस वाले लोगों पर हुए रिव्यू में वॉकिंग घुटनों पर भार डालने से चलने वाले हस्तक्षेपों के कुछ बायोमैकेनिकल उपायों में केवल छोटे बदलाव मिले और शोधकर्ताओं ने जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए सभी चलने वाले बदलावों को हानिकारक नहीं पाया।
अचानक चलने की दूरी बढ़ने से घुटनों पर तनाव क्यों बढ़ता है?
यदि मांसपेशियां और कनेक्टिव टिशू नए कार्यभार के लिए तैयार नहीं हैं, तो घुटने के आसपास असुविधा, कठोरता या घुटनों में दर्द महसूस हो सकता है। यह जरूरी नहीं कि कार्टिलेज डैमेज हो रही हो; कई बार यह ओवर यूज या भार असहिष्णुता (load intolereance) का संकेत हो सकता है।
क्या शरीर का वजन घुटनों का दबाव बढ़ा सकता है?
जॉन्स हॉपकिन्स के अनुसार आपके हर कदम पर आपके घुटनों के जोड़ों पर आपके शरीर के वजन से 3 से 6 गुना ज़्यादा दबाव पड़ता है। शरीर के वजन में 10 पाउंड की बढ़ोतरी होने पर हर कदम के साथ घुटनों पर 60 पाउंड का अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
इसके अलावा, ज्यादा वजन से लगातार अधिक मैकेनिकल दबाव होने के कारण घुटने के अंदर सुरक्षा देने वाला कार्टिलेज कुशन घिस जाता है, जिससे जोड़ों को नुकसान पहुंचने का जोखिम होता है। इसके अलावा, शरीर की ए्क्ट्रा फैट एक सक्रिय टिश्यू की तरह काम करती है और सूजन पैदा करने वाले केमिकल छोड़ सकता है, जो जोड़ों के कार्टिलेज के खराब होने की प्रक्रिया को और तेज कर सकते हैं।
हालांकि, वॉकिंग आम तौर पर घुटनों की सेहत के लिए दुश्मन नहीं है। सही तरीके से की गई नियमित वॉकिंग घुटनों की मोबिलिटी, फिटनेस और फिजिकल फंक्शन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। समस्या तब हो सकती है जब व्यक्ति अपनी एक्टिविटी को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा दे या पहले से मौजूद घुटनों की समस्या के बावजूद लगातार दर्द और सूजन को अनदेखा करे। इसलिए वॉकिंग की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है शरीर की क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे एक्टिविटी बढ़ाना, सही बॉडी वेट, मसल्स स्ट्रेंथ पर ध्यान देना।