नई दिल्ली: ‘श्री दिनेश मिल्स लिमिटेड’ कपड़े बनाने वाले पुराने ब्रांड्स में से एक है। यह कंपनी 1935 में बड़ौदा (अब वडोदरा) में शुरू हुई थी। इसने अच्छे किस्म के कोट-पैंट (सूटिंग्स) और कारखानों में काम आने वाले खास कपड़ों से अपनी अलग पहचान बनाई। 1980 के दशक में जब टीवी पर सिर्फ दूरदर्शन आता था, तब इस ब्रांड ने मशहूर क्रिकेटर सुनील गावस्कर को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाकर खूब सुर्खियां बटोरीं। गावस्कर के विज्ञापनों ने ‘दिनेश सूटिंग्स’ को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। हालांकि, समय के साथ मुकाबला बढ़ने और ग्राहकों की पसंद बदलने के कारण इस पुराने ब्रांड को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। फिर भी औद्योगिक कपड़ों के बाजार में इसका काम आज भी बना हुआ है। यहां पढ़ें ‘दिनेश सूटिंग्स’ की कहानी।
इस कंपनी की शुरुआत 1 जुलाई 1935 को बड़ौदा में हुई थी। इसे पहले ‘महारानी वुलेन मिल्स’ कहा जाता था। शुरुआत में यहां ऊनी कपड़े बनाए जाते थे। धीरे-धीरे वडोदरा (गुजरात) में इसका बड़ा कारखाना बन गया। यह कंपनी पटेल परिवार चलाता है। शानदार कोट-पैंट के कपड़े बनाने के साथ यह कंपनी कागज बनाने वाली फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी टेक्निकल टेक्सटाइल (मशीन फेल्ट्स) भी तैयार करती है।
अस्सी के दशक में इस ब्रांड को बुलंदी पर ले जाने में सुनील गावस्कर का बड़ा हाथ था। गावस्कर ने 11 साल से ज्यादा समय तक इस ब्रांड का प्रचार किया। यह अपने आप में रिकॉर्ड है। दूरदर्शन पर आने वाले उनके विज्ञापन आज भी लोगों को याद हैं। इसकी टैगलाइन ‘टेक द वर्ल्ड इन योर स्ट्राइड… दिनेश’ लोगों की जुबान पर चढ़ गई थी। इनमें से एक विज्ञापन में गावस्कर बेसबॉल खेलते हुए किसी की आइसक्रीम गिरा देते हैं। फिर उस नाराज व्यक्ति को अपना ऑटोग्राफ देते हैं।
समय बीतने के साथ बाजार में रेमंड और विमल जैसे बड़े और ताकतवर ब्रांड आ गए। दिनेश मिल्स उनके मुकाबले में पिछड़ने लगी। धीरे-धीरे उसने सीधे बाजार में बेचने के बजाय बड़े पैमाने पर माल सप्लाई करने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। उम्र और खेल के बदलते दौर के साथ जब गावस्कर का असर कम हुआ तो कंपनी ने जैकी श्रॉफ और बाद में अक्षय खन्ना जैसे अभिनेताओं को भी आजमाया। लेकिन, वे इस ब्रांड को इसकी पुरानी चमक वापस नहीं दिला पाए।
हाल के दिनों में कंपनी ने अपने कारोबार को ठीक करने के लिए कुछ बड़े फैसले लिए। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कंपनी को ठीक-ठाक कमाई और मुनाफा हुआ। इसके अलावा, कंपनी ने अपने कम चलने वाले कारोबार को समेटते हुए सितंबर 2025 में अपनी एक दूसरी कंपनी (दिनेश रेमेडीज) में हिस्सेदारी बेच दी। आज भी कंपनी अपने पुराने नाम और औद्योगिक कपड़ों के सहारे बाजार में टिकी हुई है।