Nana Patekar Death Medical Reason Explained: नाना के दिल की बिजली की व्यवस्था में आ गई थी गड़बड़ी, रुकी हुई थी धड़कन

8 अक्टूबर 2026 की सुबह अपने साथ एक दुखद समाचार लेकर आई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हम सबके बीच नहीं रहे हैं। उन्हें इलाज देने वाले मनीपाल हॉस्पिटल की रिपोर्ट्स की मानें तो नाना के दिल की बिजली की व्यवस्था में अचानक गड़बड़ी आई, जिसने गंभीर कार्डियक अरेस्ट का रूप लिया। जानकारी के मुताबिक, नाना को उनके गोवा निवास पर बेहोश स्थिति में पाया गया, उनकी धड़कन रुकी हुई थी। अस्पताल ले जाने और 45 मिनट तक लगातार प्रयास करते रहने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। लेकिन आखिर ये दिल का बिजली का तंत्र क्या होता है? और इससे उस कार्डियक अरेस्ट का क्या नाता है, जो नाना पाटेकर के निधन की वजह बना।

हार्ट के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को मेडिकल भाषा में कार्डियक कंडक्शन सिस्टम भी कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, ये नोड्स, स्पेशलाइज्ड सेल्स और इलेक्ट्रिकल सिग्नल का एक नेटवर्क होता है। दिल की धड़कन का पूरा कंट्रोल इस सिस्टम के पास होता है। दिल की पंपिंग को संचालित कर, ये कंडक्टिंग एंड मसल्स सेल्स के जरिए उसे सिग्नल देता है कि कब शरीर में खून का संचार करना है।

दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अचानक से गड़बड़ी आना कार्डियक अरेस्ट की स्थिति को जन्म देता है। ये सब इतनी जल्दी और बिना किसी लक्षण के होता है कि इसी वजह से इसे ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ का नाम भी दिया गया है।

​क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में दिल धड़कना रोककर पंपिंग करना बंद कर देता है। इससे शरीर में खून का संचार रुक जाता है। खून व ऑक्सीजन के अभाव में व्यक्ति बेहोश हो जाता है, जो नाना पाटेकर के मामले में भी सामने आया।

कार्डियक अरेस्ट से कुछ ही मिनट में मौत हो सकती है। यही कारण है कि आसपास मौजूद लोगों को इससे प्रभावित व्यक्ति को तुरंत CPR देने और अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी जाती है।

ज्यादातर मामलों में इस स्थिति का कारण दिल की धड़कन का अनियमित होना होता है। इसे मेडिकल भाषा में Arrhythmia कहा जाता है। कई मामलों में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन (V-fib) जैसी स्थिति भी देखने को मिलती है, जिसमें दिल पंपिंग की जगह कंपन करने लगता है, जो शरीर में खून के बहाव को रोक देता है।अन्य कारण

  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज का मरीज होना
  • जन्म से या फिर बाद में हुई दिल की बीमारियां
  • हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर या दिल के वाल्व और मांसपेशियों की समस्या के कारण हार्ट स्ट्रक्चर में बदलाव आना
  • गंभीर चोट या बहुत ज्यादा खून बहना
  • गंभीर संक्रमण
  • सांस लेने में गंभीर समस्या आना या सांस का रुक जाना
  • टॉक्सिन्स, दवाओं का ओवरडोज या शरीर में कुछ दवाओं का जरूरत से ज्यादा जमाव हो जाना।

परिवार में अगर कार्डियक अरेस्ट की हिस्ट्री रही हो, उससे अचानक मौत हुई हो या किसी विशेष कारण के बगैर अचानक से बेहोश होने का इतिहास रहा हो, तो ऐसे लोगों को कार्डियक अरेस्ट का खतरा ज्यादा होता है। साथ ही हार्ट कंडिशन से जूझ रहे लोगों में भी इसके होने की आशंका ज्यादा देखी जाती है।

कार्डियक अरेस्ट होने पर सीपीआर और डिफिब्रिलेशन, व्यक्ति की जान बचाने में मदद कर सकते हैं। सीपीआर की मदद से शरीर में ऑक्सीजन और खून के फ्लो को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। सीपीआर को तुरंत दिया जाना जरूरी है। इसके अभाव में महज 8 से 10 मिनट के अंदर व्यक्ति के बचने की संभावना न के बराबर रह जाती है।
वहीं डिफिब्रिलेशन में मशीन द्वारा सीने पर दिए जाने वाले इलेक्ट्रिकल शॉक से हार्ट बीट को रीस्टार्ट किया जा सकता है। इसके साथ ही आईवी के जरिए दवाइयां दी जाती हैं, जो हार्ट की रिदम को स्थिरता दे सकें।

Spread the love
Posted in Uncategorized