महिला मंडल के भजनों से गुंजायमान हुआ पंडाल, महाआरती के बाद हुआ तंबोला, विजेताओं को मिले पुरस्कार
भोपाल। कटारा हिल्स स्थित सेंचुरियन स्काई परिसर में शारदीय नवरात्रि उत्सव अपनी पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यहाँ पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक और मनोरंजक गतिविधियों के आयोजन से पूरा परिसर भक्तिभाव और उत्साह से सराबोर है।
परिसर में उत्सव को खास बनाने में महिलाओं की अहम भूमिका है। सेंचुरियन स्काई परिवार की महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन शाम को मंदिर परिसर में भजन कीर्तन का विशेष आयोजन किया जा रहा है। श्वेता जायसवाल, अल्का मिश्रा, सुखमणि राय, मधु श्रीवास्तव, सुनीता जी, सुमन सिंह और शालिनी साकल्य सहित महिला मंडल की अन्य सदस्यों द्वारा गाए जा रहे श्रद्धा और भक्ति से पूर्ण भजनों ने पूरे वातावरण को अलौकिक बना दिया है। मातारानी की आराधना में लीन होकर महिलाएँ इस उत्सव को और भी जीवंत बना रही हैं।
छप्पन भोग और दीपकों से लिखा ‘जय माता दी’ :
सेंचुरियन स्काई परिसर में दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर यहाँ आयोजित महाआरती आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इस मौके पर मातारानी को छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिसके दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। इसके साथ ही, रहवासियों ने भक्ति और रचनात्मकता का परिचय देते हुए सैकड़ों प्रज्वलित दीपकों की मदद से जमीन पर ‘जय माता दी’ की भव्य आकृति उकेरी, जिसकी मनमोहक रोशनी ने सभी का मन मोह लिया।
महाआरती के बाद तंबोला खेल की धूम :
अष्टमी की रात महाआरती और महाप्रसाद वितरण के बाद परिसर के रहवासियों के लिए एक मनोरंजक तंबोला (हाउसफुल) खेल का आयोजन किया गया। इस पारिवारिक खेल में परिसर में निवासरत सभी परिवारों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। खेल में कड़े मुकाबले के बाद दीपिका मिश्रा, आर्यन, मुक्ताश और खुशी सहित अन्य विजेता घोषित किए गए। सभी विजेताओं को जी.पी. श्रीवास्तव, विवेक साकल्ये, स्वप्निल नागोरिया और हितेश समाधिया द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए।
हवन के साथ होगा भंडारा:
नवदुर्गा उत्सव की अगली कड़ी में आयोजित होने वाले भव्य हवन के लिए भी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। हवन की वेदी और यज्ञशाला की विशेष तैयारी स्वप्निल नागोरिया, दीपेंद्र बुंदेला और अविनाश शर्मा द्वारा की गई। इसके साथ ही शाम को कन्या पूजन के साथ भंडारे और प्रसादी वितरण का कार्यक्रम रखा गया है।
सोसायटी के पदाधिकारियों और रहवासियों का कहना है कि इस तरह के सामूहिक आयोजनों से न केवल धार्मिक भावनाएँ सुदृढ़ होती हैं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली के बीच आपसी भाईचारा, सामुदायिक सौहार्द और एकजुटता भी बढ़ती है।