पांच लाख कर्मचारियों की पदोन्नति पर बड़ी बैठक आज:हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव ने बुलाई अफसरों की बैठक

मध्यप्रदेश में करीब पांच लाख कर्मचारियों की पदोन्नति के लंबे समय से अटके मामलों पर अब तेजी आने की उम्मीद है। इसी सिलसिले में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने आज मंत्रालय में सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

यह बैठक जबलपुर हाईकोर्ट के गुरुवार को दिए गए निर्देशों के आधार पर बुलाई गई है। कोर्ट ने कहा था कि विभागवार आडिट रिपोर्ट मिलने के बाद ही पदोन्नति से संबंधित कोई निर्णय लिया जा सकता है। आडिट रिपोर्ट के बिना डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विभागों से मांगी जाएगी कर्मचारियों की संख्यात्मक स्थिति

बैठक में मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधिकारी सभी विभागों को यह निर्देश देंगे कि वे अपने-अपने विभागों की संख्यात्मक स्थिति (यानी एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों का प्रतिनिधित्व किस स्तर पर है।) स्पष्ट करें। साथ ही, 17 जून 2025 को जारी नई पदोन्नति नीति और नियमों की जानकारी भी दी जाएगी।

55 में से 30 विभागों की आडिट रिपोर्ट तैयार

सूत्रों के अनुसार, राज्य के 55 विभागों में से 30 की आडिट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जबकि बाकी विभागों की रिपोर्ट प्रक्रिया में है। बैठक में इन अधूरी रिपोर्टों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि नई प्रमोशन नीति जारी होने के बाद GAD ने सभी विभागों से पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर सूचियां तैयार करने को कहा था, लेकिन इस बीच हाईकोर्ट ने पदोन्नति पर रोक लगा दी थी। अब सरकार कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सीलबंद लिफाफे में प्रमोशन सूची तैयार करने की योजना बना रही है, ताकि कोर्ट का अंतिम आदेश आते ही सूची जारी की जा सके।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार चाहें तो नई पॉलिसी के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर लें, लेकिन जब तक अदालत की अनुमति न हो, पदोन्नति के आदेश जारी नहीं किए जा सकेंगे।

प्रमोशन पर 2016 से लगी है रोक

बता दें कि 30 अप्रैल 2016 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ‘मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002’ की वह कंडिका समाप्त कर दी, जिसमें प्रमोशन में आरक्षण देने का प्रावधान था। इसके खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी, जहां से यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश मिले थे। इसके बाद सरकार ने नई प्रमोशन पॉलिसी बनाई, जिस पर फिर से याचिकाएं लगने के बाद हाईकोर्ट ने पदोन्नति पर रोक लगा दी थी। इस दौरान सरकार ने अदालत में नई नीति के तहत फिलहाल कोई प्रमोशन न करने की मौखिक अंडर टेकिंग दी थी।

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