रायपुर, कांग्रेस ने पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के कांग्रेस जिलाध्यक्षों की तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला बस्तर संभाग में आयोजित की जा रही है। इस मेगा ट्रेनिंग कैंप में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी खुद शामिल होकर संगठन को चुनावी दिशा देंगे।
आगामी चुनाव को ध्यान में रखते इस शिविर को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिविर का आयोजन जनवरी के दूसरे सप्ताह में होने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल राहुल गांधी द्वारा तय किए गए संगठन सृजन कार्यक्रम के माध्यम से जिलाध्यक्षों का चयन किया गया है।
जिला अध्यक्षों के काम की मॉनिटरिंग राहुल गांधी के कार्यालय से की जा रही है। यही वजह है कि नए पदाधिकारियों को ट्रेनिंग के माध्यम से आगामी तीन साल के लिए काम के तरीकों की रणनीति भी तैयार की जाएगी।
जिलाध्यक्षों को मिलेगा ‘परफॉर्मेंस टास्क’
- इस बार यह सिर्फ भाषणों की ट्रेनिंग नहीं होगी।
- कांग्रेस नेतृत्व हर जिलाध्यक्ष को स्पष्ट टारगेट शीट देने जा रहा है, जिसमें शामिल रहेगा।
- अपने जिले के कमजोर बूथ और नाराज वोटर समूहों पर करेंगे फोकस।
- इसके अलावा आंदोलन चलाने वाले मुद्दों के लिए रणनीति पर होगी बात।
राहुल की टीम के तमाम लीडर होंगे शामिल कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इस ट्रेनिंग कैंप में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा, शशिकांत सेंथिल सहित तमाम दिग्गज नेता और एक्सपर्ट शामिल होंगे।
मीडिया मैनेजमेंट से लेकर यह सब सिखाएंगे जिलाध्यक्षों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों, मीडिया मैनेजमेंट, सोशल मीडिया कैंपेन और जनहित से जुड़े मुद्दों के साथ ही सरकार की कमियों को उजागर करने के निर्देश दिए जाएंगे। विरोध-प्रदर्शन के तरीकों तथा जनता का अधिक से अधिक जुड़ाव पर भी फोकस रहेगा।
अध्यक्षों से वन-टू-वन बातचीत करेंगे राहुल ट्रेनिंग के दौरान राहुल गांधी जिला अध्यक्षों को न केवल संबोधित करेंगे, बल्कि जिला अध्यक्षों से वन टू वन बातचीत भी करेंगे। जिला अध्यक्षों से उनके जिले की सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
जिलाध्यक्षों को यह सब बताना होगा
बताया गया है कि राहुल गांधी प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों से उनके जिलों के प्रमुख बड़े मुद्दे, किस मुद्दे पर किस तरह काम किया जा सकता है। राज्य सरकार के किन मुद्दों पर उनको घेरा जा सकता है जिससे जनता भी उनके साथ जुड़े। वहीं पद मिलने के बाद उनके द्वारा चलाए गए अभियान की जानकारी के साथ ही आगामी रणनीति और कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।