प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1,400 करोड़ रुपए के बैंक लोन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने मशहूर कपड़ा कंपनी ‘एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड’ और इसके पूर्व सीएमडी नितिन शंभुकुमार कासलीवाल की लंदन में बकिंघम पैलेस के पास 150 करोड़ की संपत्ति को अटैच किया है।
ईडी के मुताबिक, कासलीवाल पर भारतीय बैंकों से धोखाधड़ी करने की कई एफआईआर दर्ज हैं। ईडी इंदौर के सब-जोनल ऑफिस ने 30 दिसंबर को इस प्रॉपर्टी को लेकर अटैचमेंट ऑर्डर दिया था।
2025 में विदेश में की गई ईडी की सबसे बड़ी कार्रवाई
- तलाशी और दस्तावेज जब्ती: ईडी ने 23 दिसंबर 2025 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा-17 के तहत नितिन के ठिकानों की तलाशी ली। तब कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।
- टैक्स हेवन देशों तक फैला नेटवर्क: जांच में सामने आया कि नितिन ने ट्रस्ट और शेल कंपनियों का नेटवर्क बनाया, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, जर्सी और स्विट्जरलैंड जैसे टैक्स हेवन देशों तक फैला था। टैक्स हेवन वे देश हैं, जहां कर दरें बेहद कम या शून्य होती हैं। यहां कंपनियों और ट्रस्ट के असली मालिक छुपाए जा सकते हैं। ईडी के अनुसार, नितिन ने पहले सूर्य ट्रस्ट बनाया, बाद में इसे कैथरीन ट्रस्ट कहा। इस ट्रस्ट के माध्यम से विदेशों में कंपनियों का संचालन किया।
- लंदन की संपत्ति और धन डायवर्ट करना: जांच में पता चला कि कैथरीन ट्रस्ट ने सीपीएचएल कंपनी के जरिए लंदन में महंगी संपत्ति खरीदी। नितिन ने एस. कुमार्स नेशनवाइड के माध्यम से भारतीय बैंकों का ऋण विदेश भेजा और पैसे से संपत्तियां खरीदी, जिन्हें ट्रस्ट और कंपनियों के जटिल ढांचे से छिपाया गया।
- आईडीबीआई से 1245 करोड़, यूनियन बैंक से 160 करोड़ का कर्ज
- कंपनी ने आईडीबीआई की अगुवाई वाले बैंक कंसोर्टियम से ₹1,245.15 करोड़ का कर्ज लेकर धोखाधड़ी की। कंसोर्टियम में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, पीएनबी और इंडियन बैंक शामिल हैं। यूनियन बैंक से जुड़े ₹160.68 करोड़ का कर्ज भी शामिल।
फाइनेंसर इंद्रजीत केस… नौ करोड़ के हीरे-सोना, 5 करोड़ कैश मिले
ईडी ने फाइनेंसर इंद्रजीत यादव से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई की। यादव के करीबी अमन कुमार के दिल्ली की पॉश सर्वप्रिया विहार कॉलोनी, बंगला नंबर 5/26 में लगभग 9 करोड़ रुपये के हीरे और सोने के जेवर से भरा सूटकेस बरामद किया।
साथ ही 5.12 करोड़ नकद जब्त किए गए। एक अलग बैग से चेकबुक, प्रॉपर्टी डील के कागजात और निवेश संबंधी दस्तावेज मिले, जिनकी वैल्यू 35 करोड़ आंकी गई। अधिकारियों ने इसे ‘चलता-फिरता खजाना’ बताया, जिसे आवश्यकता पड़ने पर कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता था। अब जांच एजेंसी मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है।
क्राइम मनी नेटवर्क: उगाही, प्राइवेट फाइनेंसरों से जबरन लोन सेटलमेंट हरियाणा के गैंगस्टर इंद्रजीत यादव ने एक दशक के दौरान क्राइम मनी नेटवर्क खड़ा किया। उस पर हरियाणा-यूपी में 15 केस दर्ज हैं। ईडी जांच में सामने आया कि ये नेटवर्क उगाही, हथियारों के दम पर वसूली, प्राइवेट फाइनेंसरों से जबरन लोन सेटलमेंट और हर सौदे पर कमीशनखोरी पर टिका था।
इन अपराधों से मिली नकदी को बाद में रियल एस्टेट, कंपनियों और शेल फर्मों के जरिए निवेश में बदल दिया जाता था, ताकि पैसा ‘सफेद’ दिखे। यादव फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात से अपने नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है।