इस्लामाबाद: अमेरिका से दोस्ती का तराना गाने वाले पाकिस्तान को अक्ल ठिकाने आने लगी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका पर उनके देश का फायदा उठाने का आरोप लगाया है। ख्वाजा आसिफ ने यह बाद पाकिस्तान की संसद में कही है। आसिफ ने कहा कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान का फायदा उठाया और फिर उसे टॉयलेट पेपर से भी खराब बताकर फेंक किया। पाकिस्तान की संसद में आसिफ ने कहा कि 2001 के बाद अमेरिका से फिर से जुड़ने का फैसला बहुत बड़ी गलती थी और इसके देश को भारी नुकसान हुआ।
इस्लाम के लिए नहीं लड़ा पाकिस्तान
आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिका को समर्थन देना बड़ी गलती थी और पाकिस्तान उसका नतीजा दशकों बाद भी भुगत रहा है। ख्वाजा आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान का शामिल होना धार्मिक वजह से नहीं बल्कि ग्लोबल ताकतों से सपोर्ट पाने के लिए था। उन्होंने कहा, ‘हम इन युद्धों में इस्लाम की रक्षा या जिहाद के लिए नहीं उतरे थे। हम इनमें राजनीतिक वैधता और एक सुपरपावर का सपोर्ट पाने के लिए उतरे थे।’
सुपरपावर की लड़ाई थी अफगानिस्तान युद्ध
आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध को जिहाद कहा गया वह असल में बड़ी ताकतों के बीच प्रॉक्सी लड़ाई थी। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वह जिहाद नहीं था। वह एक सुपरपावर की लड़ाई थी। उस लड़ाई (को सही ठहराने) के लिए हमने अपना एजूकेशन सिस्टम बदला। आज भी उस पाठ्यक्रम को ठीक नहीं किया गया है।’
पाकिस्तान ने नहीं सीखा सबक
आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान से सोवियत सेना की वापसी के बाद पाकिस्तान ने सबक नहीं सीखा और 11 सितम्बर 2001 के हमलों के बाद वह फिर अमेरिका के साथ हो गया। उन्होंने कहा, ‘एक दशक नहीं, बल्कि दो दशकों तक हमने खुद को किराए पर दे दिया। इसका एकमात्र मकसद अमेरिकी सपोर्ट हासिल करना था।’ आसिफ ने 9/11 के हमलों से अफगानिस्तान को क्लीन चिट दी और कहा कि इन हमलों के गुनहगारों में कोई भी अफगान नहीं था। इसके बावजूद पाकिस्तान अमेरिका की लड़ाई में शामिल हो गया।
पाकिस्तान के साथ टॉयलेट पेपर से भी बुरा सलूक
पाकिस्तानी संसद में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका के साथ जुड़ने की कीमत बहुत ज्यादा थी। ‘पाकिस्तान के साथ टॉयलेट पेपर से भी बुरा सलूक किया गया और उसे इस्तेमाल करके फिर फेंक दिया गया।’ उन्होंने देश में हिंसा, कट्टरता और आर्थिक तंगी के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया और कहा, ‘हमें जो नुकसान हुई है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।’