वॉशिंगटन: भारत को छूट देने के बाद अमेरिका ने और देशों को भी रूसी तेल खरीदने की मंजूरी दी है। शुक्रवार को वित्त विभाग के एक नोटिस के अनुसार, अमेरिकी ने पहले से ही समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दे दी है। वॉशिंगटन का यह कदम भारत को इसी तरह की छूट दिए जाने के कुछ दिन बाद ही उठाया है, क्योंकि वह ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
रूसी तेल पर 30 दिन की छूट
ट्रेजरी विभाग ने एक लाइसेंस जारी किया है जो 12 मार्च या उससे पहले जहाजों पर लादे गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े लेन-देन की अनुमति देता है। यह मंजूरी 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे ट्रंप पर युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है।
अमेरिका ने कहा अस्थायी मंजूरी
अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा आपूर्ति की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए वित्त विभाग एक अस्थायी अनुमति दे रहा है, जिससे देश समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सीमित उपाय ‘केवल उस तेल पर लागू होता है, जो पहले से ही रास्ते में है और इससे रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय लाभ नहीं होगा।’
रूसी तेल पर अमेरिका का यू-टर्न
अमेरिकी वित्तमंत्री भले ही यह दावा करते हों कि इससे रूस को कोई फायदा नहीं होगा, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। ट्रंप प्रशासन ने पहले रूसी तेल पर रोक लगाने के पीछे यह तर्क दिया था कि इससे पुतिन के यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिलती है। इसके लिए ट्रंप ने भारत जैसे दोस्त पर भी 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। अब होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग आवाजाही रुकने के बाद ऊर्जा संकट बढ़ने पर अमेरिका ने उसी रूस तेल का सहारा लिया है।