नई दिल्ली: जर्मनी का डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) भारत में अपना रिटेल और वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस समेटने की तैयारी में है। इसे खरीदने की होड़ में देश के दो बड़े प्राइवेट बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और फेडरल बैंक शामिल हैं। आठ साल में यह दूसरा मौका है जब डॉयचे बैंक भारत में अपना कारोबार बेचने की फिराक में है। ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों भारतीय बैंकों ने डॉयचे बैंक के इस पोर्टफोलियो का मूल्यांकन कर लिया है।
फिलहाल, इस डील की कीमत को लेकर बातचीत चल रही है। इस पोर्टफोलियो में पर्सनल लोन और कुछ मॉर्टगेज शामिल हैं, जिन्हें डॉयचे बैंक बेचना चाहता है। हालांकि यह साफ नहीं है कि इस पोर्टफोलियो में पर्सनल लोन और मॉर्टगेज का कितना-कितना हिस्सा है। बैंक के वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार में करीब 25,000 करोड़ रुपये की एसेट अंडर मैनेजमेंट है। मार्च 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में बैंक के रिटेल कारोबार से कुल 2,455 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आया था। यह पिछले साल के 2,362 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से 4% ज्यादा है।
भारतीयों बैंकों का क्या फायदा?
ताजा आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 के अंत तक डॉयचे बैंक के रिटेल बैंकिंग में कुल 25,038 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। डॉयचे बैंक के सीईओ क्रिश्चियन सीविंग ने वैश्विक स्तर पर बैंक को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए एक पुनर्गठन योजना शुरू की है। इसी योजना के तहत डॉयचे बैंक भारत में अपने रिटेल कारोबार से पूरी तरह बाहर निकलना चाहता है। कोटक महिंद्रा बैंक और फेडरल बैंक के प्रवक्ताओं ने ईमेल सवालों का जवाब नहीं दिया। डॉयचे बैंक के प्रवक्ता ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
विदेशी बैंकों की मुश्किल
भारत में विदेशी बैंकों को बड़े स्थानीय बैंकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उनके खर्चे ज्यादा होते हैं और वे कीमतों के मामले में कड़ी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते। साल 2022 में सिटीबैंक ने अपना क्रेडिट कार्ड और रिटेल कारोबार 1 अरब डॉलर से अधिक में एक्सिस बैंक को बेच दिया था। इसी साल कोटक महिंद्रा बैंक ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड से 3,330 करोड़ रुपये का पर्सनल लोन पोर्टफोलियो खरीदा था।
व्यावसायिक कारण
यूरोप के बाहर भारत ही एकमात्र ऐसा बाजार है जहां डॉयचे बैंक का रिटेल कारोबार है। भारत में बैंक की 17 शाखाएं हैं और इनमें से अधिकांश शाखाएं बंद हो जाएंगी। इस मामले से जुड़े एक दूसरे सूत्र ने बताया कि इस बार कंपनी गंभीर है। मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत में बैंक का मुनाफा 55% बढ़कर 3,070 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 1,977 करोड़ रुपये था। जर्मन बैंक ने मुख्य रूप से निवेश बैंकिंग, कॉर्पोरेट और ट्रांजेक्शन बैंकिंग, ट्रेजरी और डेरिवेटिव्स और प्राइवेट वेल्थ पर ध्यान केंद्रित करके अपना कारोबार बनाया है।