भारतमाला घोटाला…बैकडेट में अफसरों ने किया जमीन बटांकन

रायपुर, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में एक बड़े मुआवजे घोटाले का पर्दाफ़ाश हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 दिसंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत रायपुर और महासमुंद में 9 जगहों पर एक साथ छापे मारे।

इस ऑपरेशन के दौरान एजेंसी ने लगभग 40 लाख कैश, कई डिजिटल डिवाइस और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज़ जब्त किए। जांच एजेंसी ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच में पता चला कि अधिकारियों ने जमीन के सीमांकन (जमीन या प्रॉपर्टी के बंटवारे) की तारीख पीछे कर दी थी।

यह कार्रवाई ACB/EOW रायपुर में दर्ज FIR के आधार पर की गई थी। FIR में तत्कालीन सब-डिविज़नल ऑफिसर (राजस्व) निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों और प्राइवेट लोगों के नाम हैं, जिन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत अधिग्रहित जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया। सरकार से असल रकम से कहीं ज़्यादा मुआवजा लिया।

जमीन के कृत्रिम बंटवारे से खेला गया खेल

ED की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने साजिश के तहत जमीन के बड़े टुकड़ों को परिवार के सदस्यों के नाम पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। यह बंटवारा कागजों में पिछली तारीख दर्शाकर किया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि अधिग्रहण से पहले ही जमीन कई खातेदारों में बंटी हुई थी।

इस तरह मुआवजा नीति का फायदा उठाते हुए हर हिस्सेदार के नाम अलग-अलग मुआवजा स्वीकृत कराया गया और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की राशि निकाली गई।

40 लाख कैश, डिजिटल सबूत और संपत्तियों की पहचान

तलाशी के दौरान ED को करीब 40 लाख रुपए कैश, मोबाइल, लैपटॉप, पेनड्राइव सहित कई डिजिटल डिवाइस और जमीन से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने अपराध की आय (POC) से खरीदी गई।

ED अधिकारियों का कहना है कि कई चल-अचल संपत्तियों की भी पहचान की है, जिन्हें जल्द अटैच किया जा सकता है। जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस मुआवजा घोटाले में और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

सरकारी अधिकारी भी जांच के दायरे में

ED (प्रवर्तन निदेशालय) के अनुसार, जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे तय करने और पेमेंट में गड़बड़ियों में कई लोग शामिल हैं। जांच में कुछ प्राइवेट लोगों, उनके साथियों, सरकारी अधिकारियों और ज़मीन मालिकों के ठिकानों को शामिल किया गया है।

ED की कार्रवाई में हरमीत सिंह खनूजा, उनके साथी, कुछ सरकारी अधिकारी और ज़मीन अधिग्रहण से जुड़े जमीन मालिक शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार मुआवजे के बंटवारे से जुड़े नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध लेन-देन के मामले में जांच आगे बढ़ रही है।

कौन हैं हरमीत सिंह खनूजा ?

हरमीत सिंह खनूजा छत्तीसगढ़ के रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर से जुड़े भूमि क्षतिपूर्ति भुगतान घोटाले में नामजद एक भूमि दलाल/ एजेंट हैं। आरोप है कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को फर्जी तरीके से हासिल करने/बंटवाने में मदद की, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

उन्होंने कागजों में फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन (बदलाव) कर के मुआवजा प्राप्त किया और पैसा अलग खातों में ट्रांसफर किया। 25 अप्रैल 2025 को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उनके खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर भुगतान घोटाले में हरमीत सिंह खनूजा मुख्य आरोपी और जमीन दलाल है। हरमीत खनूजा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर हरमीत सिंह चावला की बेटी तहसीलदार रविंदर कौर से शादी की थी।

ईडी की छानबीन में आरोपी के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास घोटाले से जुड़े पैसों के लेनदेन और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। दोनों कारोबारियों के घरों से अब तक क्या मिला है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ED की टीमें अभी भी डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जानिए कैसे हुआ घोटाला ?

भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।

इस केस में दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था।

शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है।

जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए

राजस्व विभाग के मुताबिक, मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया।

मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया है।

क्या है भारत माला परियोजना ?

भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है, जिसके तहत करीब 26 हजार किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। यह कॉरिडोर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ेंगे। देश के अधिकांश फ्रेट ट्रैफिक को इन्हीं मार्गों से ले जाने की योजना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी परियोजना का अहम हिस्सा है।

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