भोपाल, बड़ा तालाब से अतिक्रमण हटाने और प्रदूषण रोकने को लेकर सोमवार को कलेक्टोरेट में हुई समीक्षा बैठक में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने साफ कहा कि वाटर बॉडी के आसपास अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जरूरी नहीं है, सीधे कार्रवाई की जाए। उन्होंने 28 फरवरी तक तालाब किनारे के बड़े अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए और कार्रवाई का टाइमलाइन तय करने को कहा। सांसद आलोक शर्मा ने भी अफसरों से तीखे सवाल करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी। तय हुआ कि अब हर 15 दिन में प्रगति की समीक्षा होगी।
सांसद ने कहा कि तालाब का क्षेत्रफल 39.8 वर्ग किमी से घटकर करीब 29.8 वर्ग किमी रह गया है। 31 वर्ग किमी भराव क्षेत्र के बावजूद प्रभावी जल क्षेत्र अब 8-9 वर्ग किलोमीटर में सिमट गया है। उन्होंने एसटीपी की संख्या, गंदे नालों की स्थिति और भविष्य की योजना पर जवाब मांगा। निगम अधिकारियों ने बताया कि कई जगह काम चल रहा है और कुछ टेंडर जारी हो चुके हैं।
मोबाइल बंद करो, बिना दबाव कार्रवाई करो
बैठक में कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी वाटर बॉडी के आसपास अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस देना जरूरी नहीं है। मौके पर जाकर सीधे अतिक्रमण ध्वस्त करो। उन्होंने दो टूक कहा हम भी मोबाइल बंद करेंगे, आप भी बंद करें और बिना दबाव कार्रवाई करें। बैठक का असर जमीन पर दिखना चाहिए। बड़े अतिक्रमण हटेंगे तभी लगेगा कि कुछ हुआ है। सांसद ने कहा कि भोपाल में विकास कार्यों के नाम पर बार-बार वक्फ बोर्ड की जमीन का हवाला देकर अड़चनें डाली जाती हैं। मेट्रो, स्मार्ट रोड और बस स्टैंड जैसे प्रोजेक्ट्स में भी इसी वजह से रुकावट आईं।
निगम कमिश्नर की अनुपस्थिति पर नाराजगी
सांसद ने बैठक में नगर निगम कमिश्नर की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इतनी अहम बैठक में कमिश्नर को मौजूद होना चाहिए था। बैठक में एडीएम, निगम अपर आयुक्त समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
गहराई और क्षेत्रफल का नया सर्वे करने के निर्देश
सांसद ने सेप्ट, केपीएमजी समेत एजेंसियों की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने और तालाब की गहराई व क्षेत्रफल का नया सर्वे कर मास्टर प्लान बनाने पर जोर दिया। सीवेज रोकने और एसटीपी क्षमता बढ़ाने की भी मांग की।
अफसरों से सवाल
तालाब किनारे बन रहे फार्म-हाउस, रेस्त्रा पर रोक की जिम्मेदारी किसकी
सांसद ने तालाब किनारे बन रहे फार्म हाउस और रेस्त्रां पर रोक की जिम्मेदारी तय करने को कहा। पूछा कि एनजीटी के कितने आदेशों पर अमल हुआ और स्थायी निगरानी टीम क्यों नहीं बनी। उन्होंने तालाब संरक्षण के लिए विशेष कमेटी गठित करने का सुझाव दिया। इस पर कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने एसडीएम से अब तक हटाए गए अतिक्रमण का ब्योरा मांगा तो अफसर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।