विशाखापट्टनम, विशाखापट्टनम से करीब 66km दूर येलमंचिली में टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बों में आग लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि रविवार रात 12:45 बजे ट्रेन में आग लगने की खबर मिली। उस वक्त ट्रेन आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली में येलमंचिली रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई थी।
जब ट्रेन में आग लगी, तो दोनों कोच में से एक में 82 और दूसरे में 76 यात्री थे। पुलिस को B1 कोच से एक शव मिला। मरने वाले की पहचान 70 साल के चंद्रशेखर सुंदरम के रूप में हुई है।
जले हुए कोच अलग करके ट्रेन को एर्नाकुलम रवाना कर दिया गया। यात्रियों को दूसरे साधनों से उनके गंतव्य तक भेजा जाएगा। दो फोरेंसिक टीमें आग लगने के कारणों का पता लगा रही हैं।
एक कोच से दूसरे में फैली आग
रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले टाटानगर एर्नाकुलम एक्सप्रेस के B1 कोच में आग लगी, फिर आग M2 कोच में फैल गई। आग की लपटें देखकर घबराए यात्रियों ने इमरजेंसी चेन खींची और ट्रेन से बाहर भागे। ट्रेन के दोनों कोच जल गए हैं, इसमें यात्रियों का सामान भी जल गया।
AC कोच में आग कैसे लग सकती है
- AC कोच पूरी तरह बिजली पर चलता है, इसलिए वायर कटने, लूज कनेक्शन या वायरिंग के पुराने हो जाने पर शॉट सर्किट हो सकता है।
- कोच के एसी या इलेक्ट्रिक पैनल के गर्म होने, कंप्रेशर या मोटर में फॉल्ट से आग लग सकती है।
- मोबाइल चार्जर या एक्सटेंशन बोर्ड में ओवरलोडिंग के कारण आग लगती है।
- इसके अलावा यात्रियों के कोच के अंदर सिगरेट, माचिस, लाइटर या ज्वलनशील चीजों के इस्तेमाल करने से आग लग सकती है।
ट्रेन में यात्रा करते हैं तो इसे भी जानिए
ट्रेन के सॉकेट सिर्फ 15–20 वॉट के होते हैं। ये मोबाइल-लैपटॉप जैसे छोटे उपकरण चार्ज करने के लिए बनाए गए हैं। इन सॉकेट में 110V AC करंट होता है, जो घरेलू 220V-240V से कम है। इनमें ओवरलोडिंग से शॉर्ट-सर्किट के चलते बोगी में आग लग सकती है। इससे लाइट, पंखे और एसी सिस्टम पर भी असर हो सकता है। ये अन्य यात्रियों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है और ट्रेन के एसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पोर्ट भी खराब हो सकते हैं।