अयोध्या में ध्वजारोहण, तो सीतामढ़ी में विवाहोत्सव: जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम में सदियों पुरानी परंपरा का उल्लास

सीतामढ़ीः अयोध्या और सीतामढ़ी के साथ ही नेपाल का जनकपुर भगवान श्री राम और मां सीता से जुड़ा पौराणिक स्थल है। अयोध्या श्री राम की जन्मस्थली है, तो सीतामढ़ी मां जानकी की प्राकट्यस्थली। जनकपुर में पुरुषोत्तम भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ है। कालांतर में जनकपुर में माता सीता के पिता राजा जनक का गृह था। बहरहाल, प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह के दिन यानी विवाह पंचमी को मिथिला क्षेत्र में यह उत्सव (राम-सीता का विवाह) पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर जनकपुर में राम जानकी मंदिर और सीतामढ़ी के पुनौरा धाम (जानकी मंदिर) पर विवाह पंचमी का कार्यक्रम पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

अयोध्या की तरह सीतामढ़ी में तैयारी

अयोध्या में रामलला के मंदिर पर पीएम नरेंद्र मोदी के द्वारा 25 नवंबर 25 को (विवाह पंचमी) ध्वजारोहण का कार्यक्रम है। वहां उत्सव जैसा माहौल है, तो यहां सीतामढ़ी में अयोध्या के कार्यक्रम के मद्देनजर कोई कार्यक्रम तो नहीं है, लेकिन विवाह पंचमी को लेकर हर वर्ष की तरह इस बार भी जोरो से तैयारी चल रही है। एक तरह से तैयारी पूरी कर ली गई है। गौरतलब है कि मिथिला क्षेत्र अंतर्गत जनकपुर और सीतामढ़ी में विवाह पंचमी को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जनकपुर में प्रभु श्रीराम और मां सीता का विवाह कार्यक्रम देखने के लिए लाखों श्रद्धालु, तो सीतामढ़ी में हजारों श्रद्धालु शामिल होते है। खास कर महिलाएं बड़ी संख्या में विवाह देखने पहुंचती है।

अयोध्या से नहीं आया है कोई न्योता

जानकी जन्मभूमि पुनौरा धाम के महंत कौशल किशोर दास के शिष्य रामकुमार दास ने NBT ऑनलाइन को बताया कि अयोध्या में होने कार्यक्रम को लेकर पुनौरा धाम मंदिर प्रबंधन को कोई न्योता नहीं आया है। बहरहाल, यहां विवाह पंचमी का कार्यक्रम मनाने की पूरी तैयारी चल रही है। सोमवार को विवाह को लेकर पूजा- मटकोर और मंगलवार को विवाहोत्सव का कार्यक्रम होगा। इधर, शहर स्थित जानकी मंदिर में भी विवाहोत्सव की तैयारी चल रही है। पुनौरा धाम के महंत के मुख्य शिष्य राम कुमार दास जी ने बताया कि शाम 7.30 बजे पूजा-मटकोर और 8.30 बजे हल्दी का कार्यक्रम है।

विवाह पंचमी को मिथिला में विवाह नहीं

विवाह पंचमी का दिन मिथिला के लोगों के लिए खास होता है। आचार्य मुकेश कुमार मिश्र के अनुसार, इस तिथि को मिथिला क्षेत्र में विवाह नहीं किया जाता है। सदियों से लोगों में धारणा है कि इस तिथि को मां जानकी का विवाह स्वयं विष्णु के अवतार श्री राम के साथ हुआ था और मां सीता को जीवन भर दुःख ही दुःख भोगना पड़ा था। इसलिए मिथिला के लोग इस तिथि को विवाह की दृष्टि से अपशगुन मानते हैं। वैसे इस पावन तिथि पर महिलाएं विवाह पंचमी का व्रत-उपवास रखकर पूजा-अर्चना करतीं हैं। मान्यता है कि इस दिन जो भी अविवाहित युवती उपवास व्रत रख प्रभु श्रीराम और माता जानकी की भाव पूर्वक पूजा-आराधना करतीं हैं, उन्हें मन योग्य पति की प्राप्ति होती है। वहीं, सुहागन स्त्रियों के दांपत्य जीवन सदा खुशहाल रहता है।

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