गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड: दोनों मां को है भूलने की बीमारी, लापरवाही ने बेटियों को मौत के मुंह में धकेला

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बहनों के सामूहिक सुसाइड के मामले में पुलिस की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। जांच से पता चला है कि परिवार में पिता की लापरवाही के साथ-साथ पहली और दूसरी पत्नियों की कम शिक्षा और भूलने की बीमारी ने बच्चियों की देखभाल में बड़ी कमी पैदा की, जिसने अंततः इस दुखद घटना को जन्म दिया।

पुलिस अब तक परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है लेकिन कोई ठोस क्लू नहीं मिला है। हालांकि, पूछताछ से यह स्पष्ट हो रहा है कि पत्नियों की स्वास्थ्य समस्या और शिक्षा की कमी ने घरेलू जिम्मेदारियों को प्रभावित किया, जिससे बेटियां मोबाइल की लत में फंस गईं और आत्महत्या कर लीं।

पत्नियों की भूलने की बीमारी

पुलिस ने बच्चियों के नाना, मौसी और मौसा से करीब तीन घंटे की पूछताछ की जिसमें सामने आया कि पिता ने दो बहनों से शादी की थीं जो सिर्फ पांचवीं पास हैं और उन्हें भूलने की गंभीर बीमारी है। इस वजह से वे बच्चियों का ठीक से ध्यान नहीं रख पाती थीं। पिता ने बच्चियों की देखभाल के लिए एक मुस्लिम युवती से तीसरी शादी की, लेकिन वह भी इस जिम्मेदारी में असफल रही।परिणामस्वरूप, तीनों बहनें घरेलू देखभाल से वंचित रह गईं और मोबाइल की दुनिया में खो गईं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पत्नियों की भूलने की आदत इतनी ज्यादा थी कि वे रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी भूल जाती थीं जिसने परिवार की संरचना को कमजोर कर दिया।

बच्चियों में मोबाइल एडिक्शन

2019 में कोविड महामारी के दौरान पिता ने बच्चियों को पढ़ाई के लिए मोबाइल दिए थे। लेकिन पत्नियों की कम पढ़ाई और भूलने की समस्या के चलते बच्चियों पर कोई निगरानी नहीं हो सकी। वे घंटों मोबाइल पर रील्स देखती रहतीं और कमरे से बाहर नहीं निकलतीं। पिता की तरफ से भी कोई ध्यान नहीं दिया गया, क्योंकि उन्होंने बच्चियों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी पत्नियों पर डाल दी थी। जब मोबाइल की लत चरम पर पहुंच गई तो पिता ने छह महीने पहले एक मोबाइल छीनकर बेच दिया और घटना से 15 दिन पहले दूसरा भी। बच्चियां यह बर्दाश्त नहीं कर पाईं और सुसाइड कर लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में माता-पिता की स्वास्थ्य समस्याएं बच्चियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं।

पिता की आर्थिक तंगी और भोग-विलास भरा जीवन

पूछताछ से यह भी पता चला कि पिता का जीवन भोग-विलास से भरा था, जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। उन्होंने ऑफिस वाले फ्लैट का किराया छह महीने से और रहने वाले फ्लैट का तीन महीने से नहीं दिया था। मीडिया को दिए बयान में पिता ने अपनी आर्थिक स्थिति को ठीक बताया था, लेकिन जांच में यह झूठ साबित हो रहा है।

पुलिस के पास अभी कई सवालों के जवाब नहीं हैं, जैसे कि पत्नियों की बीमारी का इलाज क्यों नहीं कराया गया और बच्चियों की लत पर पहले क्यों ध्यान नहीं दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

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