नई दिल्ली: पश्चिम एशिया का संकट बढ़ता जा रहा है और इसके साथ ही भारत की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। होर्मुज की खाड़ी बंद होने से भारत में तेल और गैस की दिक्कत आ सकती है। भारत का ज्यादातर कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से आता है। साथ ही भारतीय कंपनियों को भी काफी नुकसान हो सकता है। भारतीय कंपनियों का पश्चिम एशिया में अच्छा खासा एक्सपोजर है। एनर्जी, स्पेशिएलिटी केमिकल्स और जेम्स एंड जूलरी सेक्टर की कंपनियां खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में आयात करती हैं। साथ ही इन देशों को भारत से काफी निर्यात भी होता है।
लॉ फर्म Economic Laws Practice में पार्टनर और इंटरनेशनल ट्रेड एंड कस्टम्स प्रैक्टिस के को-हेड संजय नोतानी ने कहा कि उन्हें कंपनियों की तरफ से सवाल आने शुरू हो गए हैं। वे फोर्स मेज्योर क्लॉज को यूज करना चाहती हैं और साथ ही कॉन्ट्रैक्ट पर नए सिरे से बातचीत करना चाहती हैं। कुछ कंपनियों ने तो अपनी सप्लाई चेन पर नए सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है। वेयरहाउसेज और बंदरगाहों पर अटके सामान पर ज्यादा फीस लगने का खतरा है। शिपिंग और एयर ट्रैफिक में समस्या के कारण निर्यातकों और आयातकों की दिक्कत बढ़ गई है।
सबसे बड़ा ट्रेडिंग ब्लॉक
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग ब्लॉक है। 2024-25 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $178.56 अरब का रहा था जो भारत के ग्लोबल ट्रेड का 15.42% है। भारत से इन देशों को इंजीनियरिंग गुड्स, चावल, टेक्सटाइल्स, मशीनरी, जेम्स एंड जूलरी का एक्सपोर्ट होता है जबकि भारत इन देशों से कच्चा तेल, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स और सोने जैसी बहुमूल्य धातुएं मंगाता है।
कब तक चलेगी जंग?
ब्रोकिंग फर्म Emkay Global Financial Services का कहना है कि अगर लड़ाई लंबी खिंचती है तो इसका भारत पर बड़ा असर हो सकता है। लेकिन फर्म का कहना है कि यह लड़ाई ज्यादा लंबी नहीं खिंचेगी क्योंकि अमेरिका के मुकाबले ईरान ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता है। इंश्योरेंस ब्रोकर Square Insurance के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश कुमार ने कहा कि उनके कई क्लाइंट यह पूछताछ कर रहे हैं कि अगर शिपमेंट में देरी हुई या रूट में बाधा आई तो क्या होगा। इनमें ज्यादा एक्सपोर्टर और लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल हैं।