म्यांमार में बंधक बनाकर भारतीयों से कराई जा रही थी ठगी, अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गैंग का भंडाफोड़, भोपाल पुलिस का बड़ा एक्शन

भोपाल। विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर ठगी के धंधे में धकेलने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भोपाल की राज्य साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बिहार के जमुई और उत्तर प्रदेश के मेरठ से दो मुख्य एजेंटों को गिरफ्तार किया है। भोपाल निवासी जितेंद्र अहिरवार को थाईलैंड में डाटा एंट्री की नौकरी का झांसा दिया गया था।

टेलीग्राम पर इंटरव्यू कर भरोसा दिलाया और टिकट भेजकर उसे थाईलैंड भी बुला लिया गया। वहां पहुंचते ही उसे टैक्सी से थाईलैंड-म्यांमार सीमा तक ले जाकर गुपचुप तरीके से म्यांमार पहुंचा दिया गया। म्यांमार में उसे साइबर ठगी करने वाले गैंग को बेच दिया गया। वहां उसे बंधक बनाकर रखा गया और जबरन ऑनलाइन ठगी कराया जाने लगा। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट और शारीरिक शोषण भी किया जाता था।

म्यांमार सेना के रेस्क्यू के बाद घर वापसी हुई थी

संभव गनीमत रही कि कुछ समय बाद म्यांमार की सेना ने एक अभियान के दौरान जितेंद्र का रेस्क्यू किया और थाईलैंड के रास्ते भारत डिपोर्ट किया। भारत लौटकर जितेंद्र ने छह दिसंबर 2025 को भोपाल के राज्य साइबर थाने में अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अलीगंज जिला जमुई बिहार निवासी 30 वर्षीय मो. फैज अकरम को गिरफ्तार किया। वहीं दूसरे आरोपित मेरठ यूपी निवासी 30 वर्षीय मोहित अग्रवाल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करवाया गया, जिसके आधार पर उसे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने इनके पास से मोबाइल, टैबलेट और स्कैम कंपनी के आईडी कार्ड जब्त किए हैं। साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल के एसपी प्रणय नागवंशी ने बताया कि इन दोनों ने जितेंद्र के एक परिचित को झांसे में लेकर जितेंद्र को फंसाया और थाईलैंड भिजवाया था।

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