नई दिल्ली: सिविल एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए मुश्किल में फंसी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को फरवरी तक अपनी उड़ानों की संख्या कम करने के लिए कह सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एयरलाइन पायलटों की भारी कमी से जूझ रही है। इस कमी के कारण इंडिगो के नेटवर्क में भारी गड़बड़ी हुई है और इस महीने अब तक उसकी 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। इंडिगो रोजाना 2,300 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एयरलाइन को सर्दियों के शेड्यूल के दौरान हर दिन 300 उड़ानें कम करने का निर्देश दिया जा सकता है। सर्दियों का मौसम अक्टूबर के आखिरी रविवार से शुरू होकर मार्च के आखिरी रविवार तक चलता है।
इस बीच, केंद्र सरकार ने एयर इंडिया और अन्य एयरलाइनों से कहा है कि वे इंडिगो द्वारा उड़ानों में की जाने वाली कटौती के कारण होने वाली मांग को पूरा करने के लिए अपनी उड़ानों की संख्या बढ़ाएं। डीजीसीए ने सोमवार को इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। उनसे पूछा जा सकता है कि मौजूदा पायलटों की संख्या के साथ एयरलाइन कितनी उड़ानें संचालित कर सकती है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इंडिगो से उसकी भर्ती योजना, प्रशिक्षण क्षमता और क्रू शेड्यूलिंग का एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, जिसके आधार पर डीजीसीए अपना निर्णय लेगा।’
कोहरे का अनुमान
अधिकारी का कहना है कि सरकार सावधानी बरतेगी क्योंकि अगले हफ्ते से उत्तर भारत में कोहरे का अनुमान है, जिससे उड़ानों में और देरी और व्यवधान होने की उम्मीद है। इंडिगो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन को अपने पूरे फ्लाइट शेड्यूल को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अगले तीन महीनों में उपलब्ध पायलटों की संख्या बढ़ाने में सक्षम होना पड़ेगा। कैप्टन की संख्या बढ़ाना किसी भी एयरलाइन के लिए एक जटिल काम है, क्योंकि उन्हें उड़ान भरने की अनुमति मिलने से पहले महीनों के इन-फ्लाइट और ऑन-ग्राउंड प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।इंडिगो ने रविवार को लगभग 1,650 उड़ानें संचालित कीं, जो शनिवार को 1,578 उड़ानों से थोड़ी बेहतर है। एयरलाइन बड़े व्यवधानों के बाद धीरे-धीरे अपने शेड्यूल को स्थिर करने की कोशिश कर रही है। पिछले पांच दिनों में देश भर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंसे रहे। इससे पूरे देश में काफी हंगामा हुआ और एयरलाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। कई इंडिगो ग्राहकों ने शिकायत की कि एयरलाइन उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है।