म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को होगा फायदा, आईपीओ के नियम होंगे आसान, सेबी की बैठक में लग सकती है मुहर

नई दिल्ली: शेयर बाजार नियामक सेबी निवेशकों के फायदे के लिए म्यूचुअल फंड के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी में है। बुधवार को होने वाली बोर्ड बैठक में म्यूचुअल फंड की फीस कम करने, आईपीओ के नियमों को आसान बनाने और निवेशकों के खर्चों में पारदर्शिता लाने पर फैसला हो सकता है। साथ ही, सेबी अपने अधिकारियों के लिए हितों के टकराव (Conflict of Interest) से जुड़ी एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट पर भी विचार करेगा। करीब 30 साल बाद नियमों की इतनी बड़ी समीक्षा की जा रही है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री 80 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति मैनेज करती है।

अक्टूबर में सेबी ने इक्विटी और डेट फंड्स में टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) यानी कुल खर्च को कम करने का प्रस्ताव दिया था। साथ ही ब्रोकरेज फीस घटाने की भी बात कही थी। TER वह फीस है जो सेबी के नियमों के मुताबिक निवेशकों से स्कीम के खर्च के तौर पर ली जाती है। यह मैनेजमेंट और ऑपरेशनल खर्चों को पूरा करने के लिए निवेशकों से वसूली जाती है। अभी यह फीस फंड के साइज के हिसाब से अलग-अलग स्लैब में लगती है। सेबी ने अपने डिस्कशन पेपर में सुझाव दिया है कि म्यूचुअल फंड जो TER चार्ज करते हैं, उसमें 15-20 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की जानी चाहिए।

कैश ट्रांजेक्शन को लेकर बड़ा प्रस्ताव

एक और बड़ा प्रस्ताव कैश मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए ब्रोकरेज को 12 बेसिस पॉइंट्स से घटाकर 2 बेसिस पॉइंट्स करना है। वहीं, डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन के लिए इसे 5 बेसिस पॉइंट्स से घटाकर 1 बेसिस पॉइंट करने की बात है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि मार्केट के बिचौलिये इसका विरोध कर रहे हैं।

क्या होगा फायदा?
सेबी का कहना है कि ब्रोकर अभी रिसर्च और सौदे कराने के नाम पर ज्यादा चार्ज वसूलते हैं। चूंकि रिसर्च करना फंड हाउस का अपना काम है। इसलिए निवेशकों से इसके लिए अलग से पैसे लेना गलत है। सेबी के मुताबिक, निवेशकों को अनजाने में एक ही चीज के लिए दो बार पैसे देने पड़ते हैं। आनंद राठी ग्रुप के चेयरमैन आनंद राठी के मुताबिक ब्रोकरेज में प्रस्तावित कटौती लंबे समय में निवेशकों के हित में नहीं हो सकती है। किसी भी म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि ब्रोकर्स उन्हें कितनी अच्छी ‘सेल-साइड रिसर्च’ मुहैया कराते हैं।

अतिरिक्त चार्ज हो सकते हैं खत्म

सेबी टैक्स (STT, GST और स्टाम्प ड्यूटी) को फंड की फीस से बाहर रखने और फंड हाउस की ओर से लिए जाने वाले कुछ अतिरिक्त चार्ज को खत्म करने पर भी मुहर लगा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो म्यूचुअल फंड कंपनियों की कमाई थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन आम निवेशकों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी।

आईपीओ को लेकर क्या है प्लान

अभी कोई कंपनी अपना आईपीओ लाती है, तो उसके दस्तावेज इतने पेचीदा होते हैं कि आम निवेशक उन्हें समझ ही नहीं पाता। सेबी अब एक आसान और छोटी समरी लाने का विचार कर रहा है। इसमें कंपनी की कमाई, रिस्क और मुख्य जानकारी एक ही जगह मिल जाएगी, ताकि रिटेल निवेशक आसानी से फैसला ले सकें।

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