समंदर में ईरान का टोल, दबदबा रहा कायम तो भारत के लिए कैसा, संकेतों से समझ‍िए

नई दिल्‍ली: समंदर में ईरान की टोल वसूली शुरू हो गई है। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने इस बारे में अहम दावा किया है। उसका कहना है कि होर्मुज स्‍ट्रेट के रास्ते जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान फीस वसूल रहा है। जीसीसी के महासचिव जासिम मोहम्मद अल बुदैवी ने ईरान पर यह आरोप लगाया है। वह ऐसा करने वाले पहले टॉप अधिकारी हैं। होर्मुज फारस की खाड़ी में पतला पानी का रास्‍ता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पहले तक इस रास्‍ते से दुनियाभर में 20 फीसदी तेल की सप्‍लाई होती थी। बुदैवी के आरोपों ने एक सवाल पैदा कर दिया है। होर्मुज पर ईरान के दबदबे का भारत के लिए क्‍या मतलब है? ईरान का भारत समेत पांच देशों को होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने की अनुमति देना इसका कुछ-कुछ संकेत देता है।

जीसीसी बहरीन, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत छह अरब देशों का समूह है। बुदैवी इसके प्रमुख हैं। उन्होंने गुरुवार को सऊदी अरब के रियाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अपनी बात रखी।

ईरान भारत का म‍ित्र देश

जहां तक तेहरान के दबदबे का सवाल है तो ईरान और भारत मित्र देश हैं। ईरान के म‍ित्र देशों की इस लिस्‍ट में चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक जैसे देश भी शामिल हैं। उसने इन सभी देशों को कमर्शियल शिपिंग के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यह जानकारी दी।ईरान की ओर से होर्मुज स्‍ट्रेट को बाधित कर दिए जाने के बाद से ग्‍लोबल स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

अराघची ने कहा, ‘हमने कुछ ऐसे देशों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है जिन्हें हम मित्र मानते हैं। हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को आवागमन की इजाजत दी है।’ईरानी विदेश मंत्री ने साथ ही साफ किया कि ईरान के शत्रुओं से जुड़े पोतों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
वह बोले, ‘हम युद्ध की स्थिति में हैं। यह क्षेत्र युद्ध क्षेत्र बना हुआ है। हमारे दुश्मनों और उनके सहयोगियों के पोतों को इससे गुजरने देने का कोई कारण नहीं है। लेकिन, यह अन्य देशों के लिए खुला है।’

संकेतों को समझ‍िए

ईरान के विदेश मंत्री का यह बयान भारत के लिहाज से बहुत महत्‍वपूर्ण है। यह ईरान के साथ भारत के रिश्‍तों की बानगी देता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ईरान का दबदबा फिलहाल भारत के लिए फिक्र की बात नहीं है। हालांकि, उसे बहुत संतुलन बनाकर रखना होगा। इसमें जरा सी भी ऊंच-नीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।होर्मुज स्‍ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग में व्यवधान को लेकर ग्‍लोबल स्तर पर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह जलमार्ग को पूरी तरह से नहीं खोलता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

पिछले कुछ सप्ताह में भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त कराने और होर्मुज स्‍ट्रेट से ऊर्जा सप्‍लाई का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने पर केंद्रित कूटनीतिक प्रयास किए हैं।

भारत का मानना है कि अगर इस मार्ग पर अवरोध जारी रहा तो भारत सहित कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

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