महासमुंद, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित मेडिकल कॉलेज में सफाई और सुरक्षा गार्ड व्यवस्था से जुड़े डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक के टेंडर में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से हुए खुलासे के अनुसार, डीन की गैरमौजूदगी में क्रय समिति (खरीदी कमेटी) के कुछ अधिकारियों और लिपिकों ने सरकारी जेम पोर्टल की अनिवार्य प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए मैनुअल तरीके से टेंडर जारी कर दिया।
इस मामले में खल्लारी से कांग्रेस विधायक द्वारिकाधीश यादव ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभारी डीन को पावर ही नहीं है कि वो अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करें। वहीं, कॉलेज की डीन डॉ. रेणुका गहाने का कहना है कि टेंडर जारी करने के लिए नियमों का पालन किया गया है। स्वास्थ्य आयुक्त पास अप्रूवल के लिए गया था।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, आरटीआई दस्तावेजों से पता कि डीन की गैरमौजूदगी में क्रय समिति के अध्यक्ष, सदस्यों, लिपिकों ने 15 और 20 जनवरी 2025 को टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली। नियमानुसार साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए टेंडर जेम पोर्टल के माध्यम से ही जारी होने थे।
दस्तावेजों के अनुसार जेम पोर्टल पर तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय बिड खोली गई, लेकिन मैनपावर आपूर्ति का ऑर्डर पोर्टल के माध्यम से जारी नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने करीब आधे घंटे के भीतर पोर्टल से प्रिंटआउट लिया, उसके बाद सिस्टम से बाहर निकल गए।
ऑफलाइन अनुबंध कर जारी किया गया ठेका
इसके बाद 26 मई और 26 जून 2025 को ऑफलाइन कॉन्ट्रैक्ट करते हुए ठेका जारी किया गया। सफाई व्यवस्था का ठेका मेटास सिक्योरिटी एंड फायर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को 75,09,007 रुपए में दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था का ठेका बुंदेला सिक्योरिटी एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को 75,09,007 रुपए में मिला। इस तरह दोनों कॉन्ट्रैक्ट की कुल राशि लगभग पौने 2 करोड़ रुपए तक पहुंचती है।
सुरक्षा निधि में भी गड़बड़ी के संकेत
सुरक्षा निधि से जुड़ी जानकारी में भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। मेटास कंपनी से यूनियन बैंक का 3 लाख 20 हजार रुपए का एफडीआर सुरक्षा निधि के रूप में जमा कराया गया। वहीं बुंदेला सिक्योरिटी के अनुबंध में 2 लाख 40 हजार रुपए सुरक्षा निधि का उल्लेख है, मगर उसका एफडीआर जमा होने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
जेम पोर्टल से जानकारी गायब होने पर बढ़ा संदेह
आरटीआई कार्यकर्ता ने जेम पोर्टल से संबंधित दस्तावेजों की हार्ड कॉपी मांगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लिखित जवाब में बताया कि कॉन्ट्रैक्ट ऑर्डर की कॉपी जेम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। इस जानकारी के बाद पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।