नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन तो कर दिया। लेकिन अभी इस एयरपोर्ट से पैसेंजर फ्लाइट के टेक ऑफ होने में कम से कम 40 दिन का वक्त लगेगा। इसके लिए ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) की एक और एनओसी और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का ग्रीन सिग्नल मिलना जरूरी है। जो की कथित रूप से इस एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमान के विदेशी होने की वजह से अटकी पड़ी हैं।
नागर विमानन मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शेडयूल पैसेंजर फ्लाइटों के ऑपरेट होने में अभी 40 से 60 दिन का वक्त लगेगा। इसमें अभी कई काम होने बाकी है। जिसमें सिक्योरिटी प्रोग्राम के रूप में एक और एनओसी बीसीएएस को देनी है। इस एनओसी का आधार आईबी की वह रिपोर्ट होगी। जिसमें आईबी अपनी तरफ से इस एयरपोर्ट के लिए विदेशी सीईओ होने के मामले में अपनी भविष्य की सारी शंकाओं और आशंकाओं को दूर करते हुए अपनी मंजूरी वाली रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को नहीं सौंपती। इसके बाद ही यहां से पैसेंजर फ्लाइट टेक ऑफ और लैंड कर सकेंगी।
क्या कहते हैं नियम?
दोनों एजेंसियों की एनओसी मिलने में फिलहाल सबसे बड़ी बाधा इस एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ का विदेशी होना है। जो की स्विट्जरलैंड के नागरिक हैं। चूंकि, बीसीएएस के सुरक्षा को लेकर 2011 के नियम कहते हैं कि भारत में किसी भी एयरपोर्ट के सीईओ का भारतीय नागरिक होना जरूरी है, यह विदेशी नहीं हो सकता। इसलिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विदेशी सीईओ का मामला जब तक नहीं सुलट जाता। तब तक बीसीएएस इस एयरपोर्ट को सिक्योरिटी प्रोग्राम तय करने के लिए एनओसी नहीं देगा। जब तक यह एनओसी नहीं मिलेगी। तब तक यहां से कोई भी पैसेंजर फ्लाइट टेक ऑफ और लैंड नहीं कर सकती।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया
- इसके पहले चरण के निर्माण में करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत आई है
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है
- दावा किया जा रहा है कि पूरी तरह बनने के बाद यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा
- यह आईजीआई के बाद दिल्ली-एनसीआर में दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है
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कंडीशनल एनओसी
हालांकि, इससे पहले एविएशन रेगुलेटर DGCA ने यहां एयरोड्रोम के लिए और बीसीएएस ने एयरपोर्ट की सुरक्षा से संबंधित कंडीशनल एनओसी दे दी थी। लेकिन जब तक बीसीएएस की तरफ से सिक्योरिटी प्रोग्राम वाली एनओसी नहीं मिल जाती। तब तक यहां से ऑपरेशन शुरू नहीं हो सकेंगे। इस मामले में सूत्रों का कहना है कि चूंकि, देश में अभी तक सरकारी और जाइंट वेंचर पैटर्न पर ही एयरपोर्ट हैं।
नोएडा एयरपोर्ट देश में अलग तरह का वेंचर है। ऐसे में इस एयरपोर्ट के लिए विदेशी सीईओ होने के मामले में कुछ छूट या नियमों में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट भी अहम होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर विदेशी सीईओ मामले में कुछ छूट नहीं मिली तो भी इसमें कोई ना कोई बीच का रास्ता तलाशने की कोशिश की जा रही है। ताकि यहां से शेडयूल फ्लाइट ऑपरेशन शुरू किए जा सकें।