जयपुर: गुलाबी नगरी जयपुर के ‘शिकार गन हाउस’ से जुड़ी परतों ने राजस्थान पुलिस और वन विभाग की नींद उड़ा दी है। एक मामूली हेड कांस्टेबल की गिरफ्तारी से शुरू हुआ यह मामला अब टाइगर की खाल की तस्करी और अवैध हथियारों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की ओर मुड़ता दिख रहा है। एटीएस और वन विभाग की संयुक्त टीम अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि जयपुर के एक प्रतिष्ठित गन हाउस के मालिक के पास आखिर ‘बाघ की खाल’ और ‘छेड़छाड़ किए हुए हथियार’ क्या कर रहे थे?
तीन पीढ़ियों का दावा या रंगे हाथ पकड़ी गई चोरी?
छापेमारी के दौरान गन हाउस मालिक के ठिकाने से टाइगर की खाल बरामद हुई है। आरोपी पक्ष का दावा है कि यह खाल उनके पास तीन पीढ़ियों से है और यह खानदानी विरासत है। हालांकि, वन विभाग के जानकारों को पहली नजर में यह खाल संदिग्ध लगी है। खाल पर रगड़ के निशान मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि इसे हाल ही में ‘प्रोसेस’ किया गया हो सकता है।
क्या कहता है कानून?
बिना वैध दस्तावेज या पुराने रजिस्ट्रेशन के टाइगर की खाल रखना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है। अब सच्चाई FSL की रिपोर्ट से ही साफ होगी कि यह खाल कितनी पुरानी है और किस प्रजाति के बाघ की है।
300 हथियार और ‘सीरियल नंबर’ का खेल
गन हाउस से बरामद 300 हथियारों और 282 कारतूसों की जांच किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है। एटीएस को शक है कि इन हथियारों में से कई के सीरियल नंबरों के साथ छेड़छाड़ की गई है। आशंका जताई जा रही है कि वैध लाइसेंस की आड़ में अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त का काला कारोबार चल रहा था।
जैसलमेर से जुड़ा ‘अवैध सप्लाई’ का सिंडिकेट
इस पूरे कांड का खुलासा 1 अप्रैल को तब हुआ जब जैसलमेर पुलिस ने हेड कांस्टेबल अमीन खां और उसके साथी को अवैध हथियारों के साथ दबोचा। पूछताछ में अमीन ने कुबूला कि ये हथियार जयपुर के इसी ‘शिकार गन हाउस’ से खरीदे गए थे। इसके बाद पुलिस ने गन हाउस को सील कर दिया और मालिक के बेटे शमिमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया।
SIT की तैयारी और रसूखदारों में खौफ
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एक संयुक्त एसआईटी बनाने की तैयारी चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि जयपुर से सप्लाई हुए हथियार किन-किन अपराधियों और ‘सफेदपोशों’ तक पहुंचे हैं। गन हाउस के पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।