तीन बेटियां… तीन कहानियां… और तीनों में एक बात कॉमन, घर की देहरी छोड़ते वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि लौटने में सालों लग जाएंगे। नवंबर में पुलिस की कोशिशों ने इन तीन परिवारों की टूट चुकी उम्मीदों को फिर से जिंदा कर दिया। भोपाल शहर में गुम हुईं 69 बालिकाएं और 11 बालक ढूंढ निकाले। मगर हर फाइल के पीछे दर्द, डर और दुआ की अलग कहानी थी। जिनमें से ये तीन सबसे भावुक सच सामने आए…।
14 की उम्र में घर छोड़ा, 12 साल बाद मिली
पिपलानी इलाके की 14 साल की बच्ची 2013 में घर छोड़कर चली गई थी। वजह-पढ़ाई को लेकर मां से झगड़ा था। नादानी में घर की देहरी पार की… फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। रेलवे स्टेशन पहुंचकर वह पहली ही ट्रेन में चढ़ गई, जो गुजरात जा रही थी। स्टेशन–स्टेशन भटकती रही। खाने को नहीं, ठिकाना कहीं नहीं था। कुछ समय बाद फिर भोपाल लौटी, लेकिन घर नहीं गई।
इस दौरान स्टेशन पर एक परिचित युवक मिल गया, जो नौकरी के लिए चेन्नई जा रहा था। बच्ची ने अपनी हालत बताई और उसके साथ चल दी। 18 की हुई तो वहीं शादी कर ली। एक बच्चा भी हो गया। इधर, घर वाले हर त्योहार उसी उम्मीद में जीते रहे कि शायद आज दरवाजा बजे। नवंबर में पुलिस ने गोपनीय तरीके से पड़ताल की, लोगों से पूछताछ की और अंततः उसे भोपाल से ढूंढ निकाला। 12 साल बाद बेटी मां की बांहों में लौटी तो पूरा थाने का स्टाफ भावुक हो गया।
98% लाने वाली बेटी घर छोड़कर गायब हो गई
बजरिया इलाके की इस लड़की को लोग मोहल्ले की सबसे होशियार बच्ची कहते थे। 12वीं में 98% लाई, मगर पारिवारिक तनाव के चलते जनवरी 2025 में घर छोड़ दिया। पुलिस ने दूरदर्शन से लेकर सोशल मीडिया और रेलवे सीसीटीवी तक, हर जगह खोजा।
एक वीडियो में वह गोरखपुर एक्सप्रेस में अकेली बैठी मिली। इसके बाद पुलिस की टीमें लगातार ट्रेन के रूट पर तैनात हो गईं। बीना, ललितपुर, झांसी, कानपुर, अयोध्या सहित कुल 13 स्टेशन छान मारे गए। महीनों बाद एक सूचना मिली कि वह इंदौर में है। जांच वहीं फोकस हुई और लड़की मिल गई। वह बोली कि मैं पढ़ना चाहती थी, इसलिए चली गई। किसी ने बहकाया नहीं था। बेटी को देखकर पिता फूट-फूटकर रो पड़े।
इंस्टाग्राम की फोटो बनी जिंदगी की डोर
बागसेवनिया की 16 साल की बच्ची मां से झगड़कर निकल गई थी। वह भी रेलवे स्टेशन पहुंची और मद्रास जाने वाली ट्रेन में बैठ गई। रास्ते में एक महिला मिली, जिसने कहा कि काम मिल जाएगा और रहना भी हो जाएगा। वे डिंडीगुल नाम की जगह पर पहुंच गई। लड़की फैक्ट्री में नौकरी करने लगी, हॉस्टल में रहने लगी।
चार साल बीत गए, फिर एक दिन उसने रूममेट के मोबाइल से इंस्टाग्राम पर तस्वीरें डालीं। तस्वीरों की दीवारें, हॉस्टल जैसा माहौल पड़ोस के एक लड़के ने पहचान लिया और उसके माता-पिता को बताया। पुलिस ने लोकेशन ट्रैक की, फैक्ट्री का एरिया स्कैन किया और 400 किमी दूर से उसे सुरक्षित वापस लाया। मां ने पहली बार बेटी को देखा तो बस उसे चुपचाप सीने से लगा लिया।