चीफ इलेक्शन कमिश्नर से मिलने पहुंचीं ममता दीदी, अभिषेक बनर्जी हैं साथ, जानें क्या हुई चर्चा?

कोलकातानई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी नई दिल्ली में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) के मुख्यालय में चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने पहुंची हैं। उनके साथ टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद हैं। इस दौरान निर्वाचन सदन के बाहर दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स काफी तादाद में तैनात है। साथ ही रोड के किनारे बैरिकेडिंग की गई है। ममता बनर्जी रिवीजन एक्सरसाइज के खिलाफ आम सहमति बनाने के मकसद से विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं से भी बातचीत कर सकती हैं।

@5:08 अभिषेक के साथ ममता पहुंचीं निर्वाचन सदन
बंगाल में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चल रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुरू से ही इसके लिए केंद्र और चुनाव आयोग की आलोचना करती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वोटर-ओरिएंटेड बंगाल में राजनीतिक मकसद से बिना पूरी तैयारी के एसआईआर किया जा रहा है। सोमवार को वह राजधानी दिल्ली में चीफ इलेक्शन कमीशन के ऑफिस पहुंचीं। उनके साथ अभिषेक बनर्जी और एसआईआर से प्रभावित लोगों के परिवार भी थे। इस दौरान ममता बनर्जी काली शॉल में लिपटी हुई थीं। बाकी लोगों ने काले कपड़े पहने हुए थे।

बंग भवन के बाहर तैनात दिल्ली पुलिस से ममता बनर्जी की बहस
इससे पहले ममता बनर्जी की सोमवार को दिल्ली के बंग भवन के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों से बहस हुई और उन्होंने अपने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके बाद बंग भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने दावा किया कि बंग भवन में ठहरे पश्चिम बंगाल के लोगों को धमकी दी जा रही है और उन्होंने भारी पुलिस तैनाती पर सवाल उठाया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह पुलिस को नहीं, बल्कि ऊपर बैठे लोगों को दोषी ठहराती हैं।
कई ऐसे परिवार हैं जो एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कई ऐसे परिवार हैं जो एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। एसआईआर से प्रभावित परिवार जहां भी ठहरे हुए हैं, हर उस जगह पर दिल्ली पुलिस तैनात है। दिल्ली में धमाका होने पर दिल्ली पुलिस कहां होती है? उन्होंने आरोप लगाया कि लेकिन मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को दोष देती हूं। यह अक्षमता है… वे देश की रक्षा नहीं कर सकते, वे बंगाल और आम जनता को प्रताड़ित करते हैं, और एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं।दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप

बनर्जी ने कहा कि जब मैं यहां आती हूं तो वे घबरा जाते हैं… मैं लाखों लोगों को ला सकती थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली एक जमींदारी की तरह हो गई है और इसमें गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है। इससे पहले बनर्जी पुलिसकर्मियों के पास जाती हुई दिखीं और उन्होंने कहा कि मैं यहां आंदोलन करने के लिए नहीं आई हूं। अगर मैं आंदोलन के लिए आई होती, तब तो आप अपना आपा ही खो देते। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को एसआईआर से प्रभावित उन परिवारों को परेशान नहीं करना चाहिए जो शहर में आए हैं।

बंग भवन में पुलिस की मौजूदगी बढ़ी
बनर्जी ने कहा कि हम यहां न्याय के लिए आए हैं। पुलिस ने खास सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से बताए बिना कहा कि चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन और मंडी हाउस में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है और परिसरों के पास कई स्थानों पर कर्मियों को तैनात किया गया है। बनर्जी ने अपने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका भी दायर की है।

ममता का दिल्ली आने का मकसद?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर नेशनल कैपिटल की यात्रा के लिए यह समय चुना है, क्योंकि चल रहे बजट सत्र के कारण सभी विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता वहां मौजूद रहेंगे। सीएम ममता के कोलकाता लौटने की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि वह 5 फरवरी से पहले लौट आएंगी, क्योंकि उस दिन पश्चिम बंगाल विधानसभा में वोट ऑन अकाउंट पेश किया जाएगा।

बजट सत्र के बीच दिल्ली में दीदी
पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र भी महत्वपूर्ण है और ट्रेजरी बेंच सदन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करेगी। इसमें एक प्रस्ताव राज्य में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका की निंदा करने के लिए होगा। तो वहीं, दूसरा प्रस्ताव राज्य में चल रहे एसआईआर को जिस तरह से किया जा रहा है, उसकी निंदा करने के लिए होगा। इससे पहले सीईसी को लिखे पत्र में सीएम ममता ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (एसआरओ) और माइक्रो-ऑब्जर्वर के अधिकार पर सवाल उठाया था, जिन्हें उनके अनुसार, राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की समीक्षा के लिए केवल पश्चिम बंगाल में नियुक्त किया गया है।

चुनाव आयोग को ममता ने क्या लिखा था?
पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री का मुख्य तर्क यह है कि एसआरओ और माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख तक सीमित नहीं थी, क्योंकि उन्हें अप्रूविंग अथॉरिटी के रूप में भी नामित किया गया है। सीईसी के नाम लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने दावा किया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अधिकार देने से चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) असहाय, अलग-थलग पड़ गए हैं और सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अतिरिक्त अधिकार भारतीय संविधान द्वारा गारंटीकृत लोकतांत्रिक मूल्यों, संघवाद और मौलिक अधिकारों की भावना के खिलाफ है।

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