भोपाल, स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड ) वितरित करने के मामले में मध्य प्रदेश ने देश के कई बड़े और प्रमुख राज्यों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है।
लोकसभा में छत्तीसगढ़ से सांसद विजय बघेल के सवाल के जवाब में जो जानकारी दी गई। उसके मुताबिक एमपी ने गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पछाड़कर डिजिटल लैंड रिकॉर्ड बनाने और लोगों तक पहुंचाने में रिकॉर्ड बनाया है।
54 लाख से ज्यादा ग्रामीणों को मिला उनका ‘मालिकाना हक’
दस्तावेज के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक कुल 43,014 गांवों को इस योजना के लिए अधिसूचित किया गया था और इन सभी 43,014 गांवों में ड्रोन सर्वे का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। एमपी के 39,813 गांवों के लिए कुल 65,76,707 संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं । इनमें से 54,18,319 संपत्ति कार्ड ग्रामीणों को वितरित किए जा चुके हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
जानिए क्या है संपत्ति कार्ड
स्वामित्व योजना के तहत दिया जाने वाला संपत्ति कार्ड ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए उनकी संपत्ति का एक आधिकारिक और कानूनी ‘अधिकार अभिलेख’ (Record of Rights) है । पहले ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के पास मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते थे, जिसे अब ड्रोन सर्वे और आधुनिक मैपिंग तकनीक के जरिए सरकार द्वारा प्रमाणित किया जा रहा है ।
संपत्ति कार्ड से होने वाले प्रमुख फायदे
विवादों का समाधान
ड्रोन सर्वे और ‘निरंतर परिचालन संदर्भ स्टेशनों’ (CORS) तकनीक से गांव के आबादी क्षेत्रों के अत्यधिक सटीक नक्शे तैयार किए जाते हैं । इससे संपत्ति की सीमाएं स्पष्ट हो जाती हैं, जिससे वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद समाप्त हो रहे हैं ।
बैंकों से लोन की सुविधा
इस आधिकारिक कार्ड के आधार पर ग्रामीण अब अपनी संपत्ति पर बैंकों से आसानी से ऋण (Loan) प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले बिना वैध दस्तावेजों के संभव नहीं था ।
संपत्ति की खरीद-बिक्री में आसानी
कानूनी रिकॉर्ड होने से संपत्ति की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो गई है।
महिला सशक्तिकरण
मध्य प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहाँ महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का हक दिलाने के लिए संपत्ति कार्ड में ‘सह-स्वामित्व’ (Co-ownership) का विशेष प्रावधान किया गया है ।
पारदर्शी प्रक्रिया
संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले दोनों पक्षों की सहमति और जमीनी सत्यापन किया जाता है, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना नगण्य हो जाती है ।