मुस्लिम देशों को परमाणु बम और लड़ाकू विमान, पाकिस्‍तान के मुल्‍ला मुनीर का खतरनाक ‘डिफेंस डॉक्ट्रिन’, बड़ा खुलासा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने मुस्लिम दुनिया की आक्रामक रक्षा और रणनीतिक पहुंच बनाने के लिए एक डिफेंस डॉक्ट्रिन तैयार की है। इस डॉक्ट्रिन के मुताबिक पाकिस्तान की सेना आक्रामक तरीके से इस्लामिक दुनिया की रक्षा करेगी, जिसके तहत हथियारों के डील किए जाएंगे और परमाणु संधि तक की जाएगी। भारत के रक्षा सूत्रों ने इसे "रक्षा कूटनीति" का एक नया सिद्धांत बताया है। इस कूटनीति के तहत असीम मुनीर, पाकिस्तान को मुस्लिम देशों के बीच एक भरोसेमंद सैन्य सप्लायर और रणनीतिक भागीदार के रूप में पेश कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब के साथ रणनीतिक समझौता होने के बाद असीम मुनीर ने इस समझौते को और तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिससे मध्य पूर्व में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलना शुरू हो चुका है।

शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से सीएनएन-न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया के ताकतवर इस्लामिक देशों के लिए पाकिस्तान की रणनीति सिर्फ पारंपरिक हथियारों तक ही सीमित नहीं है। बल्कि पाकिस्तान को ‘एकमात्र परमाणु बम वाले इस्लामिक’ देश के तौर पर देखा जाता है। असीम मुनीर ने इस डॉक्ट्रिन को तेजी से बढ़ाया है और पाकिस्तान के डिफेंस ऑउटरीच को तेजी से बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, अभी तक पाकिस्तान की सेना ने अपने परमाणु हथियार को ट्रांसफर करने या उसे शेयर करने के लिए कोई डील नहीं की है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि जिन देशों को इजरायल से ज्यादा खतरा है, उन देशों को पाकिस्तान अपनी परमाणु छतरी का रणनीतिक भरोसा देने की कोशिश कर रहा है।

इस्लामिक देशों का ‘रखवाला’ बनना चाहता असीम मुनीर
भारत के शीर्ष सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि सऊदी अरब के पास एडवांस्ड इंटेलिजेंस असेसमेंट थे, जिनसे यमन, इजरायल-फिलिस्तीन और उत्तरी और पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों, जिसमें लीबिया, सूडान, सोमालिया और सोमालीलैंड शामिल हैं, उन देशों में बढ़ती अस्थिरता का पता चलता था। इसके साथ ही सऊदी-UAE के बीच उभरते तनाव को लेकर भी सऊदी अरब में चिंताएं थीं। इसीलिए सऊदी अरब ने शुरूआती आकलन के आधार पर पाकिस्तान के साथ रणनीतिक सैन्य समझौता कर लिया। सऊदी जानता है कि पाकिस्तानी सेना को वो अपने इशारे पर लड़ने के लिए बुला सकता है। सुरक्षा सूत्रों ने बताया है कि तुर्की भी इसी रणनीति के तहत सऊदी-पाकिस्तान के सैन्य समझौते में शामिल होना चाहता है।सिर्फ तुर्की ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के साथ साथ कई और मुस्लिम देश भी पाकिस्तान के साथ इसी तरह का रक्षा समझौता करना चाहते हैं। खासकर मौजूदा समय में जिस तरह से जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता बनी है, उस हालात में ज्यादातर इस्लामिक देश अपने आप को सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के परमाणु छतरी के नीचे आने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के उप प्रधान मंत्री इशाक डार, जो देश के विदेश मंत्री भी हैं, उन्होंने पत्रकारों को बताया है कि करीब आठ मुस्लिम देशों ने औपचारिक या अनौपचारिक रूप से इस्लामाबाद के साथ रक्षा साझेदारी की संभावना तलाशी है।

इस्लामिक देशों का ‘NATO’ बनाना चाहता पाकिस्तान
शीर्ष सुरक्षा सूत्रों के आकलन के हिसाब से सीएनएन-न्यूज-18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की, अजरबैजान, बांग्लादेश, लीबिया, सूडान, जॉर्डन, मिस्र और अन्य देश पाकिस्तानी हथियार खरीदने की भी संभावना पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब आठ अरब डॉलर के रक्षा निर्यात ऑर्डर हासिल किए हैं और अगले तीन से पांच वर्षों में उसने 20 अरब डॉलर तक हथियार बेचने का लक्ष्य रखा है।

Spread the love