NFSA राशन वितरण का नया शेड्यूल जारी, अप्रैल से जून तक का रोडमैप तैयार, समय पर मिलेगा अनाज

पटना: बिहार के राशन कार्ड धारकों के लिए राहत भरी खबर है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आगामी तीन महीनों (अप्रैल, मई और जून) के लिए खाद्यान्न वितरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग के विशेष सचिव उपेंद्र कुमार ने सभी जिलों के डीएम से कहा है कि राशन के उठाव और वितरण में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाला लाभ समय पर हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। इस नई व्यवस्था के तहत वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।

3 अप्रैल से ही मिल रहा राशन

विभाग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, अप्रैल महीने के राशन का वितरण 3 अप्रैल से प्रदेश भर में शुरू हो चुका है। इसके लिए सभी जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों को आवश्यक खाद्यान्न का आवंटन पहले ही पूरा कर लिया गया है। लाभुकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी नजदीकी पीडीएस दुकानों से निर्धारित समय पर अपना अनाज प्राप्त कर सकते हैं।

मई और जून के लिए अलग-अलग आवंटन

आगामी महीनों की योजना के बारे में विभाग ने बताया कि मई और जून के लिए राशन का आवंटन एक साथ न होकर अलग-अलग किया जाएगा। ये निर्णय स्टॉक प्रबंधन और वितरण की सुगमता को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार ने सख्त हिदायत दी है कि मई का राशन मई में और जून का राशन जून के भीतर ही वितरित होना अनिवार्य है

डोर स्टेप डिलीवरी से दुकानों तक पहुंचेगा अनाज

जन वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभाग ‘डोर स्टेप डिलीवरी’ (DSD) मॉडल पर जोर दे रहा है। इसके तहत मई और जून महीने का खाद्यान्न सीधे पीडीएस डीलरों के गोदामों तक पहुंचाया जाएगा। इससे डीलरों को अनाज उठाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और वे समय पर उपभोक्ताओं को वितरण कर सकेंगे। वितरण की नियमित मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर विशेष अधिकारियों को तैनात किया गया है

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

विशेष सचिव ने कहा कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या देरी होने पर संबंधित अधिकारियों और पीडीएस दुकानदारों की जवाबदेही तय की जाएगी। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीनी स्तर पर नियमित निरीक्षण करें ताकि खाद्यान्न की कालाबाजारी या समय पर वितरण न होने जैसी शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके।

Spread the love