सरबजीत कौर को भारत भेजने पर पलटी पाकिस्तान सरकार! मेडिकल के बाद रोका परमिट, जानें कहां रखा है

इस्लामाबाद: भारतीय नागरिक सरबजीत कौर को वापस भेजने पर पाकिस्तानी सरकार का रुख साफ नहीं हो पा रहा है। पाकिस्तान सरकार की ओर से सरबजीत की वीजा अवधि खत्म होने की बात कहते हुए वाघा बॉर्डर के रास्ते उन्हें भारत भेजने के संकेत दिए गए थे। अब कहा गया है कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने सरबजीत को वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत भेजने पर फैसला नहीं लिया है। इससे सरबजीत के भविष्य को लेकर संशय बना हुआ है।

सरबजीत कौर बीते साल नवंबर में सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान गई थीं। पाकिस्तान जाने के बाद वह अपने जत्थे से अलग होते हुए गायब हो गईं। बाद में उनके एक पाकिस्तानी शख्स से शादी करने और इस्लाम धर्म कबूल करते हुए अपना नाम नूर फातिमा रख लेने की बात सामने आई। फिलहाल लाहौर हाईकोर्ट में उनको भारत डिपोर्ट करने का केस चल रहा है।

सरबजीत पूरी तरह फिट

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, सरबजीत का दारुल अमन लाहौर में मेडिकल चेकअप हुआ और उन्हें स्वस्थ घोषित किया गया। बताया गया कि फिट होने की स्थिति में उनको भारत भेजा जाना था। पाकिस्तानी अफसरों को वाघा बॉर्डर पर उनको भारतीय अफसरों को सौंपना था लेकिन गृह मंत्रालय ने इसके लिए जरूरी अनुमति या एग्जिट परमिट जारी नहीं किया है।

एडवोकेट अली चंगेजी संधू ने कहा कि कानून के तहत कुछ खास परिस्थितियों में एक विशेष यात्रा परमिट के जरिए वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत भेजा जा सकता है। ऐसी अनुमति का इस्तेमाल आमतौर पर वीजा एक्सटेंशन या संबंधित मामलों में विकल्प के तौर पर किया जाता है। सरबजीत के मामले में अभी तक ऐसी कोई अनुमति जारी नहीं की गई है।

सरबजीत फिलहाल लाहौर में

भारत भेजने का परमिट ना होने के कारण सरबजीत कौर को लाहौर के दारुल अमन में रखा गया है। पंजाब सरकार ने इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड और धार्मिक मामलों के मंत्रालय के अनुरोध पर उन्हें शेल्टर होम में ट्रांसफर किया गया। जब तक गृह मंत्रालय जरूरी यात्रा अनुमति जारी नहीं कर देता, तब तक वह पुलिस सुरक्षा में वहीं रहेंगी।

पाकिस्तान के एडवोकेट संधू ने कहा कि सरबजीत का स्वास्थ्य ठीक है और उम्मीद है कि यात्रा परमिट जारी होने के बाद उन्हें अगले हफ्ते भारत भेज दिया जाएगा। उन्होंने सरबजीत कौर के पाकिस्तान में शरण मांगने की खबरों को भी निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला अब पूरी तरह से गृह मंत्रालय की मंजूरी पर टिका है।
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