राहुल गांधी के दौरे से मध्य प्रदेश में कांग्रेस को मिली संजीवनी, भीड़ देख उत्साहित हो गया संगठन

भोपाल। पिछले चार माह में तीन बार मध्य प्रदेश के दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस संगठन में जान भर दी है। राहुल की मौजूदगी में मंगलवार को भोपाल में हुई किसान महाचौपाल में जुटी भीड़ को कांग्रेस संगठन की संजीवनी मान रही है।

इससे बेहद उत्साहित पार्टीजन इसे संगठन सृजन अभियान की सफलता भी मान रहे हैं और इसकी कड़ी में मिशन 2028 (विधानसभा चुनाव) की तैयारी को तेज करने का निर्णय लिया है। साफ है कि पार्टी राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सदन से सड़क तक लड़ाई और तेज करेगी।

आक्रामक विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस

बता दें कि मध्य प्रदेश में 15 महीनों को छोड़कर लगभग 22 वर्षों से कांग्रेस सत्ता का वनवास भोग रही है। पिछले महीने जनवरी में इंदौर के भागीरथपुरा पेयजल कांड के पीड़ितों से मुलाकात और अब भोपाल में किसानों के मुद्दों को उठाकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आक्रामक विपक्ष की भूमिका में है।

पार्टी को मिल रहे इस जनसमर्थन को उसके आंतरिक ‘संगठन सृजन अभियान’ की सफलता से जोड़कर देखा जा रहा है। इस अभियान ने पार्टी को प्रदेश में मजबूती दी है। यही वजह है कि राहुल गांधी के भोपाल प्रवास की सूचना 20 फरवरी को आई और संगठन ने 24 फरवरी को किसान महाचौपाल का आयोजन कर लिया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश

उल्लेखनीय है कि प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया था। उस समय कांग्रेस को इसका लाभ भी मिला था और 2018 में 15 महीने के लिए उसकी सरकार बनी। बाद में फिर वही स्थिति लौट आई, लेकिन पिछले कुछ समय से संगठनात्मक अभियानों और राहुल के हाल के दौरों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।

पचमढ़ी चिंतन शिविर में भी आए थे राहुल गांधी

प्रदेश में उनके कार्यक्रमों के दौरान उमड़ी भीड़ को पार्टी के पुनर्जीवन के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, पचमढ़ी चिंतन शिविर में राहुल गांधी जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण पर आए थे, तब उन्होंने पार्टी नेताओं को गांधी की राह पर चलकर संगठन को मजबूत करने का संकल्प दिलाया था।

उन्होंने कहा था कि गांधी ने जिस तरह अहिंसा की लड़ाई लड़ी, उसी तर्ज पर कांग्रेस को भी यह लड़ाई लड़ना पड़ेगी। गांधी की तरह ही डंडे खाने के लिए तैयार रहना होगा। पार्टी नेताओं का मानना है कि इसी राह पर कांग्रेस अब सत्ता में वापसी का मार्ग आसान करेगी।

नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का भी प्रभाव

कमल नाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए केवल इसी आधार पर सत्ता में वापसी का सपना देखते रहे कि उनकी सरकार गिराने की सांत्वना में वह विधानसभा चुनाव जीत जाएंगे। उन्होंने इसी आधार पर संगठन की मजबूती पर ध्यान नहीं दिया और 2023 में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इन्हीं कारणों को चिह्नित करके कांग्रेस हाईकमान ने कमल नाथ जैसे दिग्गज नेता को हटाकर नई पीढ़ी के जीतू पटवारी को पार्टी की कमान सौंप दी।

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