मप्र के सभी जिला पंचायत और जनपद पंचायत उपाध्यक्षों को अब अतिरिक्त अधिकार दिए जाएंगे। इन उपाध्यक्षों की भूमिका शिक्षा समितियों में बढ़ाई जाएगी। यह बतौर शिक्षा समिति अध्यक्ष स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। इनके सुझावों पर शासन अमल नहीं करता था। अब न केवल इसे रिकॉर्ड पर लिया जाएगा, बल्कि शासन की कार्रवाई का हिस्सा बनाया जाएगा।
यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "आत्मनिर्भर पंचायत–समृद्ध मध्यप्रदेश’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में की। सीएम ने कहा कि जिस सभागार में आप बैठे हैं, यहां कभी विधानसभा सत्र आयोजित होते थे। हमारी इच्छा है कि आप सभी पंचायत प्रतिनिधि नई विधानसभा तक पहुंचें। सरकार पंचायतों को लगातार मजबूत कर रही है।
सरपंचों को 25 लाख तक खर्च का अधिकार
सरपंचों को 25 लाख रुपए तक खर्च करने का अधिकार दिया है। यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे और अधिकार दिए जाएंगे। उन्होंने पंचायतों को पीने के पानी की व्यवस्था करने का अधिकार को लेकर कहा कि हर घर पानी का मिशन भी आपको ही पूरा करना है। सीएम ने कहा कि पंचायतें निवेश और निवास के लिए मास्टर प्लान तैयार करें। इसकी शुरुआत विदिशा जिले से की जा रही है। आत्मनिर्भर बनाने की ठोस रणनीति पर मप्र में काम किया जा रहा है।
दो बार की टोका-टाकी: राजगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सौंधिया ने कार्यक्रम में दो बार मुख्यमंत्री को टोका। पहले कहा कि अधिकार छीने जा रहे हैं। फिर कहा- जिला व जनपद अध्यक्षों को बायपास कर सीधे सरपंचों को राशि दी जा रही है। सीएम ने कहा- सभी मुद्दों पर सीएम हाउस में मिलकर समाधान निकालेंगे।
खुद की आय बढ़ाने के तरीके सिखाए गए
कार्यक्रम में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभागीय जानकारों ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से समझाया कि वे कैसे अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इसके लिए गांव में रिक्त पड़ी जमीनों पर विकास कार्य करवाकर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। पानी और स्वच्छता के बदले कुछ टैक्स लगाकर पंचायत की आय बढ़ा सकते हैं।
कार्यशाला में साइबर एक्सपर्ट ने सोशल मीडिया और सरकारी योजनाओं के लिए ऑनलाइन काम के दौरान फ्रॉड से बचने के तरीके सिखाए। 26 नवंबर को ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के साथ संवाद होगा। इस मौके पर मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित किया।