क्या शेयर बाजार से पैसा निकाल लें? पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक्सपर्ट्स ने कही बड़ी बात

    नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में हाल में काफी गिरावट आई है। लगातार चार दिन की गिरावट के बाद गुरुवार को शेयर बाजार में तेजी आई थी लेकिन आज शुरुआती कारोबार में बाजार में फिर गिरावट दिख रही है। बाजार में चल रही इस उतार-चढ़ाव ने अब वेल्थ अडवाइजर्स की चर्चा का रुख मोड़ दिया है। अब वे ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने की बात कर रहे हैं।

    1. क्या हो रणनीति?
      Ventura सिक्योरिटीज के डायरेक्टर गाबाजीवाला कहते हैं कि हालात अभी बदल रहे हैं। यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि अगले कुछ दिनों में चीजें क्या रुख लेंगी। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को बचाने की कोशिश करनी चाहिए और शेयरों में बहुत ज्यादा जोखिम भरे दांव लगाने के बजाय ‘रुको और देखो’ की नीति अपनानी चाहिए।
    2. क्या लम्पसम सही है?
      फाइनैंशल प्लानर्स निवेशकों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे जल्दबाजी में एकमुश्त (लम्पसम) पैसा शेयरों में न लगाएं। उनका कहना है कि युद्ध या तनाव कब तक चलेगा और तेल की कीमतों पर इसका क्या असर होगा, इस बारे में अभी कुछ भी पक्का नहीं है।
    3. कब तक रहेगी ये स्थिति?
      प्लान अहेड वेल्थ अडवाइजर्स के फाउंडर विशाल धवन का कहना है कि इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल मुद्दों के असर को शांत होने और बाजार को वापस सामान्य होने में 1 से 6 महीने तक का समय लग सकता है।
    4. क्या पैसा निकाल लें?
      विशाल धवन का कहना है कि जिन निवेशकों को जल्द पैसों की जरूरत है, उन्हें अपने पोर्टफोलियो की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। वे कहते हैं, जिन्हें अगले छह महीनों के भीतर पैसों की जरूरत है, वे अभी बाजार से बाहर निकल सकते हैं। जिनके पास एक साल का वक्त है, वे पैसा निकालने के लिए कुछ समय इंतजार कर सकते हैं।
    5. क्या एंट्री का सही मौका है?
      कुछ वेल्थ मैनेजर्स इस गिरावट को एक मौके के तौर पर देख रहे हैं। Fisdom के रिसर्च हेड नीरव करकेरा का कहना है कि बाजार में यह उथल-पुथल एंट्री करने का एक अच्छा मौका है। वे सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने असेट एलोकेशन पर टिके रहना चाहिए और अगले तीन महीनों के दौरान धीरे-धीरे लार्ज-कैप फंड्स में निवेश बढ़ाना चाहिए।
    6. क्या करें निवेशक?
      कुछ सलाहकारों का कहना है कि यह गिरावट पोर्टफोलियो को फिर से रीबैलेंस करने का भी एक मौका हो सकती है। खासकर तब, जब लंबे समय तक बाजार में रही तेजी की वजह से पोर्टफोलियो में शेयरों का हिस्सा जरूरत से ज्यादा बढ़ गया हो। जानकारों का कहना है कि उतार-चढ़ाव के दौर में पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा आधार ‘डाइवर्सिफिकेशन’ (निवेश को अलग-अलग जगहों पर बांटना) ही है। नीरव करकेरा का कहना है कि जब शेयर बाजार गिरता है, तो डेट (Debt) फंड सुरक्षा कवच का काम करते हैं, सोना पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है। निवेशक लार्ज कैप पर फोकस करें।
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