बंधक की गई कॉलोनी के भूखंडों को शासन से बिना विमुक्त करवाए तीसरे पक्ष को बेचने के मामले में ईओडब्ल्यू की इंदौर ईकाई ने एफआईआर दर्ज की है। ईओडब्ल्यू ने डीएचएल इन्फ्राबुल्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों को आरोपी बनाया है।
इस मामले में हुई शिकायत की सत्यापन रिपोर्ट में यह सामने आया कि आरोपियों ने बंधक संपत्ति को गलत तरीके से बेचकर अनुचित आर्थिक लाभ लिया, जिससे मप्र शासन को राजस्व का भी नुकसान हुआ।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि कंपनी के डायरेक्टर्स को यह पता था कि आईकॉनस लैंडमार्क-1 और आईकॉनस लैंडमार्क-2 के कुल 249 भूखंड, कॉलोनी विकास के बदले कॉलोनी सेल इंदौर में बंधक रखे गए थे। वर्तमान स्वामित्व शासन के पास होने के बाद भी कंपनी ने इन भूखंडों को विमुक्त नहीं करवाया।
इसके बाद भी आरोपियों ने अपर कलेक्टर, कॉलोनी सेल से कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र लिए बगैर इन बंधक भूखंडों में से 15 भूखंड, तीसरे पक्ष को बेच दिए।
इतना ही नहीं उनके एवज में रजिस्ट्री भी कर दी। सत्यापन में धोखाधड़ी और दस्तावेजों के दुरुपयोग का पता चलने पर जांच एजेंसी ने कंपनी के तीन संचालकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इनमें संतोष कुमार सिंह, संजीव जायसवाल और अनिरुद्ध देव शामिल हैं। इन्हें आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी का आरोपी बनाया गया है।