धान की पराली जलाने के मामलों में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। सेटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में 4,507 और मध्यप्रदेश में 3,569 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश (2,224), राजस्थान (1,577) और हरियाणा (435) का नंबर है।
मप्र में सबसे ज्यादा 614 घटनाएं नर्मदापुरम और दूसरे नंबर सिवनी (533) है। भोपाल में भी अब तक पराली जलाने की 30 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह देर से फसल कटाई का संकेत है।
राज्य में कटाई अक्टूबर के अंत से नवंबर तक चलती है। ऐसा खासकर नर्मदापुरम, श्योपुर, गुना और दतिया जिलों में होता है। जबकि प्रशासन ने एयर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट, 1981 के तहत प्रतिबंध लगाया है। चेतावनियों और जुर्माने के बावजूद बाहरी इलाकों में पराली जलाई जा रही है।
सांसों के लिए खतरनाक ये धुआं
पराली जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। ये मिलकर स्मॉग (धुंध) बनाती हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। एक्यूआई बढ़ने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, आंखों में जलन, एलर्जी और हृदय रोग बढ़ते हैं। बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। जलती पराली मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन और पोषक तत्व नष्ट कर देती है।
रोकने के उपाय… पराली जलाने वालों पर पिछले साल एफआईआर, जुर्माने का प्रावधान किया गया। पटवारी-आरआई को मौके पर कार्रवाई के लिए भेजा गया। किसान सम्मान निधि, योजनाओं में लाभ न देने के आदेश।