भोपाल: शहर में कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। पिछले दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई छोटे व्यवसायियों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
केंद्र के आदेश के बावजूद राहत नहीं
उल्लेखनीय है कि शनिवार को केंद्र सरकार ने रेस्तरां, ढाबों और कैंटीनों के लिए 20 प्रतिशत गैस कोटा आवंटित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, भोपाल में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी है।
प्रशासन और व्यापारियों के बीच समन्वय की कमी इस देरी की मुख्य वजह बन रही है। खाद्य विभाग के अधिकारी अब तक इस बात पर स्पष्ट निर्णय नहीं ले सके हैं कि किसे, कितने और कैसे सिलिंडर दिए जाएं।
एसीएस के साथ बैठक, नहीं निकला समाधान
रविवार दोपहर 12:30 बजे वल्लभ भवन में अपर मुख्य सचिव (एसीएस) खाद्य विभाग के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें भोपाल और इंदौर के होटल व रेस्तरां संचालक शामिल हुए।
व्यवसायियों ने बैठक में स्पष्ट कहा कि सप्लाई मांग के अनुसार होनी चाहिए। वहीं एसीएस ने पीएनजी कनेक्शन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने की सलाह दी।
हालांकि, व्यापारियों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया। उनका कहना था कि खाना पकाने के लिए हाई प्रेशर गैस की जरूरत होती है और डीजल या केरोसिन के इस्तेमाल से खाने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
सूची तैयार न होने से अटका वितरण
कमर्शियल सिलिंडर वितरण को लेकर प्रशासन की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। पिछले सप्ताह छोटे होटल संचालकों को 10-10 प्रतिशत सप्लाई देने का निर्णय लिया गया था और इसके लिए लाभार्थियों की सूची बनाने की बात कही गई थी।
लेकिन अब तक यह सूची तैयार नहीं हो सकी है। वर्तमान में 20 प्रतिशत कोटा लागू होने के बावजूद अधिकारी अब भी सूची बनाने की प्रक्रिया में ही उलझे हुए हैं। इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।