नई दिल्ली: लगातार दो तिमाहियों में हैरतअंगेज GDP ग्रोथ के बाद हाल में केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 7.4% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान दिया। इस बीच, राज्य कह रहे हैं कि उनकी कमाई घट रही है। आगामी आम बजट से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ एक अहम बैठक में राज्यों ने कहा कि उन्हें विशेष मदद दी जाए।
सेस का मसला
एक बड़ा मुद्दा सेस और सरचार्ज का भी है। राज्यों को केंद्र के टैक्स रेवेन्यू का 41% हिस्सा मिलता है, लेकिन सेस, सरचार्ज में उनका हिस्सा नहीं होता। राज्यों ने कहा, कुछ हिस्सा उन्हें दिया जाए।
GST का असर
22 सितंबर को GST दरें घटी थीं। SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके चलते वित्त वर्ष में राज्यों और केंद्र का कुल लॉस 1.11 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है, लेकिन कम रेट के चलते उपभोग बढ़ने से नेट लॉस कम रहेगा। शनिवार को हुई प्री-बजट मीटिंग में विपक्ष शासित राज्यों ने यह मुद्दा उठाया।
केंद्रीय योजनाओं का मुद्दा
केंद्र की नई योजनाओं में राज्यों की बढ़ी हिस्सेदारी, लोन सीमा बढ़ाने और प्राकृतिक आपदाओं के लिए विशेष पैकेज की मांग भी की गई।
DBT का असर
कई राज्य सरकारें चुनावी वादों के मुताबिक लोगों को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर(DBT) के जरिए पैसे दे रही हैं। DBT स्कीमों पर बढ़ते खर्च से राज्यों के राजस्व घाटे और विकास कार्यों पर असर पड़ने की चिंता भी जताई गई।