भोपाल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने बड़े तालाब के भोज वेटलैंड के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई में एनजीटी ने जिला प्रशासन और नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और जलग्रहण क्षेत्र में चिह्नित अवैध अतिक्रमणों को दो सप्ताह के भीतर हटाकर रिपोर्ट दें।
पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान ने याचिका में भोज वेटलैंड के चारों ओर हो रही अवैध गतिविधियों पर चिंता जताई गई है। इसमें उन्होंने बताया कि तालाब के संरक्षित क्षेत्र में पक्के निर्माण, रिसार्ट और व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। वेटलैंड के भीतर कंक्रीट प्लांट, फ्लाई ऐश ब्लाक बनाने की इकाइयां स्थापित कर दी गई हैं, जो वेटलैंड नियम 2010 और 2017 का सीधा उल्लंघन हैं।तालाब में मिट्टी का भराव किया जा रहा
तालाब के प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकने के लिए अवैध रूप से मिट्टी का भराव किया जा रहा है और कचरा डंप किया जा रहा है। इस पर एनजीटी ने कहा कि वेटलैंड की प्राकृतिक स्थलाकृति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम से सात अक्टूबर 2025 को हुई पिछली सुनवाई में बताए गए विशिष्ट अतिक्रमणों को हटाकर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल 2026 को होगी। तब तक प्रशासन को अतिक्रमण मुक्त क्षेत्र की वास्तविक स्थिति रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखनी होगी।
यहां बताए अतिक्रमण
बैरागढ़ कलां में सेवन ओक्स होटल और व्यापारिक गतिविधियों को तालाब के एफटीएल के पास अवैध स्थाई निर्माण माना गया है।
लखापुर क्षेत्र में कमल लाल द्वारा भोज वेटलैंड के बफर क्षेत्र में अवैध कॉलोनी विकसित की गई है।
एके एसोसिएट्स, खजूरी सड़क द्वारा पानी के बहाव को रेत और मिट्टी डालकर रोकने और एफटीएल के भीतर निर्माण किया गया।
भारत भवन के पास 50 मीटर बफर क्षेत्र में प्राकृतिक चट्टानों और पहाड़ियों को अवैध रूप से तोड़ा गया है।
इंदौर-सीहोर रोड, बैरागढ़, लखापुर में पाटीदार फार्म, बैरागढ़ कलां, भैंसा खेड़ी, भौरी, जमोनियाचीर और कोलू खेड़ी में भगवान सिंह, हरविंदर सिंह भाटिया, विष्णु खत्री, हर्ष ललवानी और कृष्णा कुमारी सिंघल जैसे नामों के निर्माणों को चिह्नित किया गया है।
अतिक्रमण बताई गई मस्जिदों पर वक्फ का दावा
एनजीटी में बुधवार को आर्या श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया कि प्रशासन ने भोज वेटलैंड पर प्रशासन ने 35 अतिक्रमण चिह्नित किए थे। नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने बताया कि निगम ने इनमें से नौ अतिक्रमणों को हटा दिया है। शेष पर कार्रवाई के लिए जब दस्ता मौके पर पहुंचा, तो स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी।
वहीं, वक्फ बोर्ड की ओर पेश अधिवक्ता मोहम्मद इकराम ने अतिक्रमण बताई गई दो मस्जिदों पर दावा किया। उनका कहना था कि मस्जिदें नवाब काल की हैं। 1962 में इनको वक्फ के तौर पर अधिसूचित किया जा चुका है। एनजीटी ने कहा कि एनजीटी केवल पर्यावरण कानूनों के तहत सुनवाई करता है। जमीन किसकी है और किसका मालिकाना हक है, यह तय करना सिविल कोर्ट या राजस्व विभाग का काम है।