कर्ज की राशि से सिर्फ निर्माण संबंंधी विकास हो रहे:डिप्टी सीएम देवड़ा की प्रेस कांफ्रेंस

डिप्टी सीएम और वित्त व वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाले ऋण को कर्ज नहीं निवेश कहेंगे। कर्ज की इस राशि से सिर्फ अधोसंरचना के कामों को ही कराया जाता है। उन्होंने लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा घोषणा किए जाने पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर कहा कि सरकार इसके लिए घोषणा के आधार पर प्रबंधन कर लेगी। देवड़ा ने कहा कि वित्त विभाग श्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन द्वारा शून्य आधारित बजट तैयार कर रहा है।

डिप्टी सीएम देवड़ा ने कहा कि तीन वर्षों के लिये रोलिंग बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें बजट प्रक्रिया से संबंधित नवाचार अपनाए जा रहे है। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने यह जानकारी मीडिया से चर्चा में दी। इस दौरान यह जानकारी दी गई है कि लिमिट में कर्ज लेने के साथ राज्य सरकार हर साल 28 से 30 हजार करोड़ रुपए का ब्याज कर्ज की राशि पर चुका रही है।

बार-बार कर्ज लेने पर एसीएस वित्त रस्तोगी ने दिया जवाब

सरकार द्वारा बार-बार कर्ज लिए जाने के सवाल पर अपर मुख्य सचिव वित्त विभाग मनीष रस्तोगी ने कहा कि बजट मैनेजमेंट एक्ट के अंतर्गत ऋण लेने की व्यवस्था तय की गई है। चूंकि राज्य सरकारें कर्ज लेकर चुका नहीं पाती हैं। इसलिए बजट प्रबंधन अधिनियम बनाया गया है। बजट प्रबंधन अधिनियम का उल्लंघन किए बगैर भारत सरकार द्वारा निर्धारित लिमिट के आधार पर राज्य सरकार कर्ज लेती है। जीएसडीपी का तीन प्रतिशत लोन सरकार ले सकती है। इस साल की जीएसडीपी 16 लाख 94 हजार करोड़ की है। इसका तीन प्रतिशत कर्ज सरकार ले सकती है। रस्तोगी ने कहा कि जितना एलाउड है उतना ही ऋण ले रहे हैं। राज्य सरकार आज की तारीख में 28 से 30 हजार करोड़ रुपए सालाना ब्याज चुकाती है। अपर मुख्य सचिव रस्तोगी ने कहा कि ऋण लिमिट में लिया गया है। कोविड के समय ऋण का पैसा भी राजस्व में लगाना पड़ा था। विकास के लिए कर्ज लेना जरूरी है। इसलिए ही सरकार कर्ज लेती है। भारत सरकार ने सेस योजना लागू की है, वह कर्ज भी दिखाई देता है जो अधिक लगता है जबकि इसे 50 साल में लौटाना होता है।

रोलिंग बजट बनेगा पर विधानसभा में आ नहीं सकेगा

अपर मुख्य सचिव वित्त रस्तोगी ने कहा कि सरकार 2028-29 तक के लिए रोलिंग बजट तैयार कर रही है पर इसे विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकेगा क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। रोलिंग बजट का फायदा यह है कि किस विभाग ने कितना पैसा खर्च किया है और कितना बाकी है, इसका हिसाब सरकार के पास होता है।

टैक्स चोरी रोकने के लिए हो रहे प्रयास

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि शासकीय सेवकों, पेंशनरों के हित में कई निर्णय लिये गये है। वाणिज्यिक कर विभाग की दो साल की विभागीय उपलब्धियां बताते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55 हजार 634 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक कुल 34 हजार 829 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक डेटा एनालिटिक्स आधारित चिन्हित प्रकरणों में प्रवर्तन कार्यवाहियों से 967 करोड़ एवं ऑडिट की कार्यवाही से 404 करोड़ रु का राजस्व प्राप्त हुआ है। बुरहानपुर, राजगढ़, खरगोन, झाबुआ, कटनी एवं नरसिंहपुर जिलों में नए कार्यालय भवनों का निर्माण कराया जा रहा है।

आबकारी विभाग की आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना

देवड़ा ने बताया कि राजस्व में वृद्धि के लिये राज्य तथा देश के बाहर मदिरा के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये एकीकृत पॉलिसी बनाई जाएगी। मदिरा उपभोग, विक्रय के एक दिवस का लाइसेंस मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जारी किया जाएगा। प्रदेश के सभी शासकीय विभाग, निगम, मंडल द्वारा दिए जा रहे वर्क आर्डर तथा भुगतान की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके, इसके लिये डेटा रिपोजटरी बनाया जाएगा। डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से प्रवर्तन की कार्यवाही की जावेगी तथा बोगस व्यवसायियों पर निगरानी रखी जाकर गलत ITC के उपयोग पर अंकुश लगाया जाएगा। टैक्स चोरी पर नियंत्रण एवं निगरानी के लिए यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग में अलग से डेटा एनालिटिक्स एवं टैक्स रिसर्च यूनिट का गठन किया जायेगा।

पंजीयन विभाग की उपलब्धियां

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य है जिसमें 75 प्रकार के दस्तावेज पट्टा, पॉवर ऑफ अटर्नी, बंधक इत्यादि का घर बैठे वीडियो केवायसी के माध्यम से पंजीयन हो रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि संपदा 2.0 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में स्वर्ण पदक मिला है।

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