भोपाल-इटारसी रेलखंड के मिडघाट सेक्शन में रेलवे के ट्रैक डिजाइन में बदलाव के कारण ट्रेनों की सुरक्षा और स्पीड दोनों बढ़ गई हैं। यहां पहले बल्वेरिया (उभार वाला) पैटर्न पर आधारित ट्रैक था, पर अब उसे घोड़े की नाल जैसी आकृति वाले क्लासिक हॉर्स शू कर्व से बदला गया है।
दरअसल, पर्वत श्रृंखला और रातापानी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले बुधनी-बरखेड़ा सेक्शन में पहले ट्रैक सीधा और तीखी चढ़ाई वाला था। बल्वेरिया पैटर्न में सवारी और मालगाड़ियों को डबल इंजन लगाकर चलाना पड़ता था। गति भी सीमित थी। अब तीसरी रेल लाइन के निर्माण के दौरान रेलवे ने यहां ट्रैक को घोड़े की नाल जैसी गोलाई दी है।
इस डिजाइन में चढ़ाई धीरे-धीरे पूरी होती है, जिससे इंजन पर दबाव कम पड़ता है और ट्रेन बिना झटके ज्यादा स्पीड पकड़ लेती है। पहाड़ों के बीच 5 टनल बनाकर ट्रैक की ऊंचाई कम की गई। इससे तेज चढ़ाई खत्म हो गई। अब ट्रेनें 90 किमी/घंटे से ज्यादा की रफ्तार से दौड़ रही हैं।
ये दो खासियतें
मप्र का सबसे बड़ा हॉर्स शू कर्व यह क्लासिक हॉर्स शू कर्व मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा है, जिसकी लंबाई 2 किमी से अधिक है। पूरी बुधनी-बरखेड़ा लाइन की लंबाई 26.5 किमी है।
5 टनल, एक की लंबाई 1.2 किमी भोपाल-बीना प्रस्तावित चौथी लाइन के लिए 5 टनल में से दो पहले से अतिरिक्त ट्रैक के साथ तैयार की गई हैं। इस ट्रैक पर बनी एक टनल 1.2 किमी लंबी है।
हॉर्स शू कर्व… इससे इंजन पर दबाव कम पड़ता है
रेलवे के रिटायर्ड सेक्शन इंजीनियर ए.के. दुबे के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में सीधा ट्रैक रखने पर चढ़ाई और ढलान ज्यादा हो जाती है। मिडघाट में पहले बल्वेरिया पैटर्न का ट्रैक था, जिसमें ट्रेन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती थी। हॉर्स शू कर्व डिजाइन से इंजन पर दबाव कम होता है, ट्रेन की स्पीड बढ़ती है, पटरी से उतरने का खतरा घटता है। ट्रैक ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनता है।