पटना: यूजीसी की नई गाइडलाइन 2026 आने के बाद सत्ता की राजनीति की क्या दिशा होगी? यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है, पर यूजीसी के नए निर्देश ने विपक्षी एकता में जान फूंक दी है। बिहार में मुद्दाविहीन और बिखरे विपक्ष को यूजीसी के नए निर्देश ने एक प्लेटफार्म तो उपलब्ध करा दिया है। बढ़ते विरोध के स्वर से यह तो साफ दिख रहा है कि 2 फरवरी से शुरू हो रहे बिहार विधान मंडल का सत्र नीतीश नीत सरकार को अग्निपरीक्षा से न गुजार दे।
मंडल कमीशन जैसा बनने लगा माहौल?
यूजीसी के नए निर्देश के बाद एक बार फिर समाज दो वर्गों में बंटता साफ दिख रहा है। यूजीसी के नए निर्देश के समर्थक इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बढ़ा बेहतर कदम मान रहे हैं। इस नए निर्देश से उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव ख़त्म होंगे। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विरुद्ध भेदभाव खत्म होगा।यह अलग बात है कि इस नए निर्देश के विरोधी इसे समरसता के लिए घातक बता रहे हैं। उनका मानना है कि ये सामान्य वर्ग के लोगों के खिलाफ है, क्योंकि इसमें सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के खिलाफ फर्जी आरोप लगाए जा सकते हैं, जो उनके करियर के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
इस नए निर्देश में राजनीति की बू
बिहार विधानमंडल सत्र के आरंभ होने से पहले ही राजनीतिक दल अपने अपने हितों को साधने में लग गए हैं। यह पहली बार है कि सत्ता पक्ष के साथी दल अपनी ही सरकार के निर्णय पर खुल कर बोल नहीं पा रहे हैं। हैरतअंगेज तो यह है कि यूजीसी के नए निर्देश के साथ विपक्ष खड़ा होकर पीएम नरेंद्र मोदी की धन्यवाद दे रहे हैं।
मजबूत होगी सामाजिक न्याय की धारा: भाई वीरेंद्र
आरजेडी के वरीय नेता एवं विधायक भाई वीरेंद्र ने यूजीसी के नए निर्देश पर अपना पक्ष रखते साफ कहा है कि जो भी निर्णय आया है, उसे निश्चित रूप से लागू किया जाना चाहिए। इसका विरोध वही लोग कर रहे हैं जो समाज के विरोधी हैं और नहीं चाहते कि गरीब, दलित और वंचित तबके के बच्चे आगे बढ़ें। यह निर्देश सामाजिक न्याय की धारा को मजबूत करने के लिए जरूरी भी है।
समानता का अधिकार मजबूत होगा: तेज प्रताप
जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव यूजीसी के नए निर्देश को विश्वविद्यालय में समानता लाने के लक्ष्य के रूप में देखना चाहिए। इस नए निर्देश के मुताबिक, ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी। इससे समानता और अधिकार को अधिक मजबूती देगा। हम और हमारी पार्टी जनशक्ति जनता दल इस दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यूजीसी द्वारा लाए गए इस ऐतिहासिक कानून का स्वागत एवं समर्थन करता है।
क्या चल रहा है बीजेपी के भीतर?
बिहार भाजपा के भीतर भी यूजीसी के नए निर्देश के बाद विरोध और समर्थन का खेल चल रहा है। पर अक्सर गलत नीतियों का विरोध करती रही भाजपा फिलहाल चुप है। एक नीति के तहत यूजीसी के नए निर्देश पर पक्ष और विपक्ष में कोई तर्क सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। पर यूजीसी के नए निर्देश का विरोध भीतर ही भीतर होने लगा है। ऐसे भाजपाई मुखर भले नहीं हैं, पर उनका मानना है कि वर्तमान हालात से शिक्षण संस्थानों में चिंता और आशंका का माहौल बन रहा है। बिना संतुलित प्रतिनिधित्व के बनाई गई समितियां न्याय नहीं कर सकतीं। ऐसी समितियां सिर्फ औपचारिक निर्णय देती हैं, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। मुश्किलें और भी बढ़ जाती है।