उज्जैन में होगा ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यक्रम में जुटेंगे दिग्गज वैज्ञानिक और विद्वान

भोपाल। प्राचीन काल से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में ”विश्व गुरु” रहे भारत की खगोलीय विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए मध्य प्रदेश की धार्मिक और वैज्ञानिक नगरी उज्जैन एक ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक उज्जैन और डोंगला में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसका मुख्य विषय “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम ” रखा गया है।

वीर भारत न्यास के निदेशक और मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य उज्जैन के समीप स्थित डोंगला ग्राम को विश्व के मध्यान (मेरिडियन) के रूप में स्थापित करना है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण डोंगला वर्तमान में काल गणना का सटीक केंद्र बिंदु माना जाता है।

कार्यक्रम में देश-विदेश के दिग्गज वैज्ञानिक और विद्वान जुटेंगे। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में आइआइटी इंदौर और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी सह-आयोजक हैं।

मुख्य आयोजन से पूर्व जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली (24 फरवरी), काशी (9 मार्च), पुरी (10 मार्च) और बेंगलुरु (23 मार्च) जैसे शहरों में ”प्री-कांफ्रेंस इवेंट” आयोजित किए जा रहे हैं। तीन अप्रैल को उज्जैन के तारामंडल परिसर में भव्य उद्घाटन होगा, जिसमें शिक्षा जगत के विशेषज्ञों से लेकर अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस दौरान एक्सपो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और डोंगला वेधशाला का भ्रमण भी रहेगा।

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