तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने हथियारों की संख्या दोगुनी से ज्यादा कर दी। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत से तनाव कम नहीं होता है, तो युद्ध शुरू हो सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी महीने के आखिर में कहा था कि ‘बहुत विशालकाय, बहुत ताकतवर जहाज ईरान की तरफ बढ़ रहे हैं और अमेरिका को उम्मीद है कि उनका इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।’ इस बीच डिप्लोमेसी भी चल रही है और ओमान में अमेरिका और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई है।
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस से पता चला है कि पिछले दो महीनों में अमेरिका ने ईरान में अपने हमलावल हथियारों की संख्या दोगुनी से ज्यादा कर दी है। ये सबकुछ वैसा ही है, जैसा वेनेजुएला में हमले से पहले हुआ था। हालांकि ईरान, वेनेजुएला की तरह कमजोर नहीं है। ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर अमेरिका युद्ध शुरू करता है तो ये युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। ईरानी मिसाइल, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, उसके एयरक्राफ्ट कैरियर और इजरायल को निशाना बना सकती हैं। जबकि ईरान के साथ जारी पहले राउंड की बातचीत के बीच US मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन ने अमेरिकी व्यापारिक जहाजों को ईरानी पानी से दूर रहने की एडवाइजरी जारी की है
ईरान के साथ बढ़ते तवान के बीच अमेरिका अपना एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पहले ही ईरान के नजदीक मिडिल ईस्ट में भेज चुका है। इसके साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर – USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS माइकल मर्फी, और USS स्प्रुअंस अरब सागर में भेजे गये हैं। अपनी ताकत दिखाते हुए US मिलिट्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिंकन कैरियर ग्रुप की तस्वीरें जारी कीं, जो अरब सागर में चल रहा था और उसके ऊपर एयरक्राफ्ट उड़ रहे थे। इसके बाद यह कैरियर, US नेवी के तीन और डिस्ट्रॉयर के साथ जुड़ गया, जिनमें से दो अभी होर्मुज स्ट्रेट के पास और एक रेड सी में हैं।
इसके अलावा ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसने अपने यूरोफाइटर टाइफून फाइटर जेट को "डिफेंसिव कैपेसिटी" के साथ कतर में तैनात किया है। वहीं, पिछले हफ्ते बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एक दर्जन F-15 फाइटर जेट, एक MQ-9 रीपर कॉम्बैट ड्रोन और कई A-10C थंडरबोल्ट II ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट जॉर्डन के मुवफ़्फ़ाक साल्टी एयर बेस पर पहुंचे हैं। बीबीसी ने सैटेलाइट इमेजरी का एनालिसिस किया था, जिसमें दिखाया गया था कि गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाज, USS डेल्बर्ट डी ब्लैक, मिस्र में स्वेज कैनाल से भूमध्य सागर से लाल सागर तक जा रहा था, और एक US नेवी MQ-4C ट्राइटन सर्विलांस ड्रोन खाड़ी के ऊपर काम कर रहा था।
अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बैठक हुई है। रिपोर्ट्स से पता चले हैं कि ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्द्धन को 60 प्रतिशत से कम करने की पेशकश की है और बदले में अमेरिकी प्रतिबंध को कम करने की मांग रखी है। अमेरिका की तरफ से इसपर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई है। लेकिन इस बीच अमेरिका ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। उन्हें ईरान के नजदीक के समुद्री क्षेत्र से दूर रहने को कहा गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई के लिए एक अहम शिपिंग लेन है।
गाइडेंस के मुताबिक, US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन के मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन ने US झंडे वाले कमर्शियल जहाजों को सलाह दी है कि वे ईरान के पानी से जितना हो सके दूर रहें। यानि पूरे मिडिल ईस्ट और अरब सागर में चप्पे चप्पे पर युद्धपोत और बाकी हथियार प्लेटफॉर्म तैनात करके अमेरिका, ईरान पर काफी ज्यादा प्रेशर बना चुका है। ईरानी लीडरशिप जानती है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो हो सकता है युद्ध लंबा चले, लेकिन पूरी लीडरशिप को अमेरिका खत्म कर देगा। इसीलिए वो अब अमेरिकी मांगों को मानने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।