पाकिस्तान ने ट्रंप को ललचाने क्या शब्जबाग दिखाए, असीम मुनीर का ईमेल सार्वजनिक, भारत-चीन पर क्या लिखा, जानें

इस्लामाबाद: भारत के साथ संघर्ष खत्म होने के बाद 14 मई 2025 को शाम 4 बजकर 59 मिनट पर अमेरिका के सीनियर अधिकारी पॉल डब्ल्यू. जोन्स को एक ईमेल आया। पॉल डब्ल्यू. जोन्स, पहले पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत थे। वो अब वाशिंगटन में स्थित लॉ और लॉबिंग फर्म स्क्वॉयर पैटन बोग्स में इंटरनेशनल अफेयर्स एडवाइजर के तौर पर काम करते हैं। ये ईमेल पाकिस्तान की तरफ से आया था। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सार्वजनिक तौर पर भारत से जंग खत्म करवाने के लिए धन्यवाद दिया गया था। इसके बाद ईमेल में अमेरिका से संबंध सुधारने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिए गये थे, जिनमें टैरिफ, ट्रेड और क्रिटिकल मिनरल्स का जिक्र किया गया था। इस ईमेल के बाद ही पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने वाइट हाउस की यात्रा की थी, जहां डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात हुई थी।

पाकिस्तान ने जो ईमेल लिखा था, उसके साथ एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट भेजा गया था। जिसका टाइटल था ‘एक नया पाकिस्तान-अमेरिका राज्य संबंध।’ इसमें पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका का आर्थिक, सुरक्षा और जियो-पॉलिटिकल पार्टनर के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। जोन्स वॉशिंगटन एक मंझे हुए डिप्लोमेट हैं और वो कजाकिस्तान और पोलैंड में अमेरिका का राजदूत रह चुके है। अब वो विदेशी सरकारों को अमेरिका को लेकर पॉलिसी बनाने में मदद करते हैं। जोन्स से पाकिस्तान ने कहा कि वो अमेरिकी विदेश विभाग से फिर से जुड़ना चाहता है।

पाकिस्तान ने अमेरिका में कैसे किया सेटिंग?
जोन्स ने पाकिस्तान को वापस जो ईमेल लिखा, उसमें उन्होंने पूछा कि क्या ‘प्रपोजल में कुछ छुट गया है’ या ऐसा कुछ जो ‘ट्रंप प्रशासन को अटपटा लग सकता है।’ इसके अलावा जोन्स ने एरिक नाम एक शख्स के साथ मीटिंग करवाने का सुझाव दिया। अब एरिक कौन हैं, ये काफी दिलचस्प है। एरिक का पूरा नाम एरिक मायर्स है। वो एक डिप्लोमेट हैं, जो अभी नॉर्वे में US मिशन में चार्ज डी’अफेयर्स हैं। वो साउथ और सेंट्रल एशियन अफेयर्स ब्यूरो के पूर्व सीनियर ब्यूरो ऑफिशियल भी रह चुके हैं। इस दौरान वो पूरे साउथ और सेंट्रल एशिया में 21 डिप्लोमैटिक पोस्ट्स की देखरेख करते थे। इस बातचीत से पता चलता है कि पाकिस्तान को इस बात की जानकारी थी कि अमेरिका के साथ उसके संबंधों को भारत-अमेरिका संबंध के लिहाज से देखा जाएगा।
अमेरिका को दुर्लभ खनिज देने को पाकिस्तान तैयार
ईमेल में अटैच डॉक्यूमेंट में पाकिस्तान ने खुद को एक दुर्लभ खनिज संपदा से भरपूर देश के तौर पर पेश किया था। इसमें उसने बताया था कि पाकिस्तान में तांबा, लिथियम, कोबाल्ट और निकेल का विशाल भंडार है और वो अमेरिकी कंपनियों के लिए बिना किसी शर्त दरवाजा खोल रहा है। पाकिस्तान ने कहा कि उसके पास अरबों डॉलर के खनिज संसाधन हैं, जो अमेरिका की सुरक्षा और सप्लाई चेन के लिए बेहद जरूरी है। पाकिस्तान ने साफ तौर पर अमेरिका के साथ एक द्विपक्षीय महत्वपूर्ण खनिज समझौते की मांग की थी। सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने अमेरिका से वादा किया था कि वो ISIS के खिलाफ अमेरिका की मदद से आतंकवाद विरोधी अभियान चलाएगा। जबकि उसने तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के खिलाफ अभियान में ट्रंप प्रशासन का साथ मांगा था। इसके अलावा पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में छूटे अमेरिकी हथियारों को बरामद करने में सहायता करने की बात कही थी।
भारत-चीन को लेकर पाकिस्तान के ईमेल में क्या था?
पाकिस्तान के ईमेल में भारत, चीन, ईरान और अफगानिस्तान के साथ संबंधों को लेकर भी बात की गई थी। इसमें यह तर्क दिया गया था कि "चीन के साथ पाकिस्तान के संबंध भौगोलिक और व्यावहारिक थे, न कि किसी को बाहर करने वाले और अमेरिका-भारत के बीच के मजबूत संबंध, अमेरिका-पाकिस्तान के संबंध के बीच में रुकावट नहीं बनने चाहिए। अफगानिस्तान को लेकर पाकिस्तान ने अमेरिका से मिलती जुलती चिंताएं जताई थी और उसने अफगानिस्तान में खुद को अमेरिका का रणनीतिक संपत्ति बताया था। पाकिस्तान के इस ईमेल का असर कुछ ही हफ्तों में असर दिखाने लगा, जब अमेरिका से असीम मुनीर को वाइट हाउस आने का न्योता मिल गया। असीम मुनीर से डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में 18 जून को मुलाकात की और फिर पाकिस्तान के समर्थन में डोनाल्ड ट्रंप ने कई बयान दिए हैं, जो भारत को असहज करने वाले रहे हैं।
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