ढाका: बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले गठबंधन और सियासी जोड़तोड़ की कोशिशें तेज हो गई हैं। चुनाव करीब आने के साथ ही भारत विरोधी रुख के लिए पहचान रखने वाली जमात-ए-इस्लामी की चिंता बढ़ रही है। कुछ दिन पहले तक चुनाव को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली जमात को शायद अब अपनी जीत मुश्किल दिख रही है। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि किसी भी तरह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ गठबंधन कर लिया जाए।
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर्रहमान ने कहा है कि उनकी पार्टी राष्ट्रहित में बीएनपी के साथ काम करना चाहती है। जमात नेता ने कहा कि उनकी पार्टी 12 फरवरी के चुनाव और नई सरकार बनने से पहले तारिक रहमान के साथ बातचीत चाहते हैं। शफीकुर्रहमान ने गुरुवार शाम को BNP के दफ्तर में खालिदा जिया की शोक सभा में यह बातें कही हैं।
BNP को मनाने की कोशिश
शफीकुर्रहमान ने तारिक रहमान और बीएनपी के वरिष्ठ नेताओं से खालिदा जिया की मौत के बाद मुलाकात की है। बैठक के दौरान रहमान ने BNP और जमात के लंबे समय तक रहे गठबंधन को याद किया। उन्होंने कहा कि हमने अतीत में देश हित में एक साथ काम किया है। अल्लाह ने चाहा तो हम भविष्य में भी देश के लिए काम करना जारी रखेंगे।शफीकुर्रहमान ने कहा है कि अगले पांच सालों में राष्ट्रीय स्थिरता के लिए और एक स्वस्थ राजनीतिक माहौल बहाल करने के लिए हमें सामूहिक रूप से रचनात्मक विकल्पों पर सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमात दो साल की उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में सरकार बनाने से पहले BNP के साथ एक बैठक करने की योजना बना रही है।
क्या डरे हुए हैं रहमान?
बीडी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रहमान ने खालिदा जिया को याद करते हुए उनको बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल करने वाली नेता बताया। जमात नेता की बीएनपी से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश को एक्सपर्ट चुनाव के बारे में उनके डर से जोड़ रहे हैं। खासतौर से तारिक रहमान की ढाका वापसी के बाद बीएनपी के पक्ष में बने माहौल ने जमात का डर बढ़ाया है।